हाथी-मानव द्वंद्व का बढ़ा खतराः कोरबा-कटघोरा में 250 से ज्यादा मकान ध्वस्त, 33 एकड़ फसल क्षतिग्रस्त, 11 लोगों की मौत

कोरबा, 6 अक्टूबर। धान की फसल अब बालियां आने के दौर में पहुंच गई है। खेतों में लहलहा रही धान की फसल की सुगंध हाथियों के झुंड को जंगल से खेतों तक खींच ला रही है। इसके साथ ही वनांचल के गांवों में हाथी-मानव द्वंद्व का खतरा एक बार फिर बढ़ गया है। हाथियों का दल रात ही नहीं बल्कि दिन में भी खेतों में पहुंचकर खड़ी फसल को रौंदने और चरने से किसानों की महीनों की मेहनत बर्बाद कर रहे हैं।
स्थिति यह है कि किसान अपनी जान जोखिम में डालकर रात में खेतों की रखवाली करने को मजबूर हैं। वन विभाग के अनुसार कटघोरा वनमंडल में 52 और कोरबा वनमंडल में 13 हाथी विचरण कर रहे हैं। दोनों वनमंडलों में पिछले एक माह के दौरान हाथियों ने करीब 33 एकड़ फसल को नुकसान पहुंचाया है।
कटघोरा वनमंडल के पसान सर्किल में हाथियों का उत्पात लगातार जारी है। तराईनार जंगल में डेरा जमाए करीब 52 हाथियों का दल रात होते ही जंगल से बाहर निकलकर आसपास के गांवों और खेतों की ओर बढ़ रहा है। बीती रात हाथियों ने भर्रापारा, कुम्हारीसानी, बोकरामुड़ी और तराईनार गांव के खेतों में पहुंचकर धान की फसल को नुकसान पहुंचाया। कई खेतों में हाथियों ने खड़ी फसल को रौंदने के साथ ही उसे चर दिया।
ग्रामीणों के अनुसार हाथियों का दल दिनभर जंगल में रहता है और शाम ढलते ही सक्रिय हो जाता है। कई बार यह दल अलग-अलग झुंडों में बंटकर गांवों की ओर बढ़ता है। रातभर खेतों और गांवों के आसपास विचरण करने के बाद सुबह होने से पहले वापस जंगल लौट जाता है। इस वजह से ग्रामीणों को दिन के साथ-साथ रात में भी सतर्क रहना पड़ रहा है।
धान की फसल इस समय किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण दौर में है। बालियां निकलने के साथ ही फसल तेजी से पकने की ओर बढ़ रही है। ऐसे समय हाथियों के खेतों में पहुंचने से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों की लगातार आवाजाही के कारण खेतों की निगरानी करना भी मुश्किल हो गया है। कई किसान समूह बनाकर खेतों के आसपास निगरानी कर रहे हैं, लेकिन हाथियों के बड़े दल के सामने उनकी सुरक्षा भी चिंता का विषय बनी हुई है। प्रभावित किसानों ने फसल नुकसान का शीघ्र आकलन कर मुआवजा देने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों की मौजूदगी के कारण खेती करना लगातार जोखिम भरा होता जा रहा है।
कोरबा वनमंडल के करतला परिक्षेत्र में भी हाथियों की मौजूदगी बनी हुई है। यहां चार हाथियों का दल कोटमेर क्षेत्र में दिनभर विचरण करता रहा। रात में हाथियों ने बड़मार गांव की ओर रुख किया और खेतों में पहुंचकर धान की फसल को नुकसान पहुंचाया। पसान में 52 और करतला क्षेत्र में चार हाथियों की मौजूदगी से वनांचल के किसानों की चिंता बढ़ गई है। वन विभाग की टीमें हाथियों की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं और ग्रामीणों को हाथियों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।
हाथियों की लगातार आवाजाही का असर अब यातायात पर भी पड़ रहा है। पतुरियाडांड के पास हाथियों का झुंड एक ही स्थान पर लंबे समय तक मौजूद रहने के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग पर भारी वाहनों की कतार लग रही है। विशेषकर देर रात हाथियों के सड़क के आसपास पहुंचने पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित होती है। इससे वाहन चालकों को भी खतरा बना रहता है। ग्रामीणों और राहगीरों को कई बार जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ता है।
