एचटीपीएस में राखड़ परिवहन के नाम पर फर्जीवाड़ाः पर्यावरण विभाग ने 1.05 लाख का लगाया जुर्माना

जाना था सिवनी -कोसमंदा, पहुंच गए पंडरीपानी

कोरबा, 6 अक्टूबर। “जाना था जापान, पहुंच गए चीन” वाली कहावत तो आपने सुनी ही होगी। लेकिन कोरबा में राख परिवहन के दौरान कुछ ऐसा ही मामला सामने आया है। जाना था सिवनी-कोसमंदा, लेकिन राख से लदा वाहन पहुंच गया पंडरीपानी! मामला सामने आते ही पर्यावरण विभाग ने कार्रवाई करते हुए 35 टन फ्लाई ऐश पर 1 लाख 5 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।

मामला एचटीपीएस दर्री से जुड़ा है। क्षेत्रीय पर्यावरण अधिकारी प्रसन्ना सोनकर के अनुसार शुक्रवार को राख ठेकेदार पशुपति नाथ की गाड़ी एचटीपीएस दर्री के सायलो से राख लोडकर सिवनी-कोसमंदा के लिए रवाना हुई थी। लेकिन निर्धारित गंतव्य तक पहुंचने के बजाय वाहन कथित तौर पर पंडरीपानी स्थित एक फ्लाई ऐश ब्रिक्स फैक्ट्री में राख खाली करने पहुंच गया।

सूचना मिलते ही पर्यावरण विभाग की टीम ने मौके पर कार्रवाई की। जांच के दौरान करीब 35 टन राख का मामला सामने आया, जिसके बाद विभाग ने कार्रवाई करते हुए 1,05,000 का जुर्माना अधिरोपित किया।

सिवनी-कोसमंदा और जमीन पर ठिकाना पंडरीपानी! अब सवाल यह है कि राख परिवहन के लिए तय रूट और गंतव्य बदलने की नौबत आखिर क्यों आई? क्या वाहन निर्धारित स्थान पर पहुंचा ही नहीं या फिर राख का कोई दूसरा ठिकाना पहले से तय था?

फिलहाल पर्यावरण विभाग की कार्रवाई के बाद राख परिवहन से जुड़े इस मामले ने कई सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। खासकर यह कि एचटीपीएस से निकलने वाली फ्लाई ऐश आखिर किस रास्ते और किस ठिकाने तक पहुंच रही है, इसकी निगरानी व्यवस्था कितनी पुख्ता है?

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