आईएलबीएस में आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के मुफ्त इलाज पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, सरकार से मांगा जवाब

नईदिल्ली, 01 अक्टूबर । सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तहत बुधवार को दिल्ली सरकार से उस याचिका पर जवाब मांगा, जिसमें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मरीजों के लिए मुफ्त इलाज के अपने दायित्व का पालन करने के लिए ‘यकृत एवं पित्त विज्ञान संस्थान’ (आईएलबीएस) को निर्देश देने की मांग की गई है।
शीर्ष अदालत ने उस याचिका पर सुनवाई करने पर सहमति जताई, जिसमें यहां आईएलबीएस में कथित मरीज अधिकारों के उल्लंघन और वित्तीय अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की मांग भी की गई है। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की पीठ ने दिल्ली विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अवधेश कुमार साह के बेटे राहुल राज की ओर से दायर याचिका पर संज्ञान लिया। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि दिल्ली के वसंत कुंज स्थित आईएलबीएस में ‘व्यवस्थित अनियमितताओं के कारण’ उन्होंने अपनी बीमार मां को खो दिया। वकील विवेक शर्मा के माध्यम से दायर याचिका को चार नवंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।
याचिका में आईएलबीएस को ‘माननीय न्यायालय के नौ जुलाई, 2018 के बाध्यकारी फैसले का पालन करने’ का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। इस फैसले के तहत रियायती दरों पर सरकारी जमीन पाने वाले सभी अस्पतालों को समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लोगों को न्यूनतम 10 प्रतिशत आईपीडी (अंतरंग रोगी विभाग) और 25 प्रतिशत ओपीडी (बहिरंग रोगी विभाग) में मुफ्त चिकित्सा उपचार उपलब्ध कराना अनिवार्य है।
