//सेवा की कहानी//-प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से प्रतीक के कारोबार को मिली रफ्तार, जीवित मछली विक्रय से बढ़ी आय और आत्मनिर्भरता

कोरबा 25 सितंबर 2026/ मेहनत के साथ यदि सही संसाधन और शासकीय योजना का सहयोग मिल जाए, तो छोटे स्तर से शुरू किया गया व्यवसाय भी आगे बढ़ सकता है। कोरबा विकासखंड के कोरबा निवासी 24 वर्षीय प्रतीक आदिले, अनुसूचित जाति वर्ग से हैं। वे अपने परिवार के साथ मछली विक्रय का कार्य करते थे। सीमित संसाधनों और परिवहन की सुविधा के अभाव में उन्हें व्यवसाय को बड़े स्तर पर संचालित करने में अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।

प्रतीक का परिवार आसपास के बाजारों में मछली का विक्रय करता था। परिवहन के लिए अन्य साधनों पर निर्भर रहने के कारण अतिरिक्त खर्च वहन करना पड़ता था। साथ ही जीवित मछलियों को समय पर बाजार तक पहुंचाना भी चुनौतीपूर्ण था। परिवहन की सीमित सुविधा के कारण अधिक मात्रा में मछली का विक्रय कर पाना संभव नहीं हो पाता था। छोटे स्तर पर व्यवसाय संचालित होने से अपेक्षित लाभ भी नहीं मिल पाता था और कई बार संसाधनों के अभाव में नुकसान भी उठाना पड़ता था।

इसी बीच प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना ने प्रतीक के व्यवसाय को नई दिशा दी। योजना के अंतर्गत उन्हें जीवित मछली एवं मछली उत्पादों के सुरक्षित और सुगम परिवहन के लिए चार पहिया वाहन उपलब्ध कराया गया। उद्योग मंत्री श्री लखनलाल देवांगन द्वारा उन्हें योजना के तहत यह वाहन प्रदान किया गया, जिससे उनके मछली विक्रय व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक परिवहन सुविधा मिली।

चार पहिया वाहन मिलने के बाद अब प्रतीक जीवित मछलियों को सुरक्षित एवं सुविधाजनक तरीके से विभिन्न बाजारों और ग्राहकों तक पहुंचाकर उनका विक्रय कर पा रहे हैं। मछलियों को समय पर बाजार तक पहुंचाने से उनकी गुणवत्ता और बिक्री मूल्य बनाए रखने में भी मदद मिल रही है। परिवहन की सुविधा बढ़ने से अब वे पहले की तुलना में अधिक मात्रा में मछली का विक्रय कर पा रहे हैं और नए ग्राहकों तक भी पहुंच बना रहे हैं।

प्रतीक बताते हैं कि पहले मछली विक्रय से उन्हें लगभग 10 हजार रुपये प्रतिमाह की आमदनी होती थी। अब परिवहन की सुविधा मिलने के बाद उनकी मासिक आमदनी बढ़कर लगभग 20 हजार रुपये तक पहुंच गई है। इससे उनके परिवार को आर्थिक रूप से मजबूती मिली है और व्यवसाय को आगे बढ़ाने का आत्मविश्वास भी बढ़ा है।

प्रतीक के लिए यह योजना केवल वाहन मिलने तक सीमित नहीं रही, बल्कि उनके पारंपरिक व्यवसाय को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाने का माध्यम बनी है। अब उन्हें बाजार तक पहुंचने में आसानी होती है, ग्राहकों तक समय पर मछली पहुंचा पा रहे हैं और परिवहन पर होने वाले अतिरिक्त खर्च में भी राहत मिली है। इससे उनके परिवार के जीवन स्तर में सुधार आया है और भविष्य को लेकर आर्थिक सुरक्षा की भावना मजबूत हुई है।

प्रतीक ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के माध्यम से मिली सहायता के लिए शासन एवं मत्स्य विभाग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सही समय पर मिली परिवहन सुविधा ने उनके व्यवसाय को आगे बढ़ाने का अवसर दिया है। अब वे अधिक आसानी से ग्राहकों तक मछली पहुंचा पा रहे हैं और अपनी आमदनी बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

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