सेवा मेरा योगदान ने बदली हसदेव-सर्वमंगला घाट की तस्वीर

जनभागीदारी से दूर हुई गंदगी, स्वच्छता से निखरा नदी घाट का स्वरूप; धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों के महत्वपूर्ण स्थल को मिली नई सुंदरता

कोरबा, 24 सितंबर 2026/ सुबह का समय था। हसदेव नदी का किनारा, सरबंगला-सर्वमंगला घाट और आसपास का क्षेत्र आम दिनों की तरह लोगों की आवाजाही का साक्षी था। लेकिन नदी घाट के आसपास जमा कचरा और गंदगी इस महत्वपूर्ण धार्मिक एवं सामाजिक स्थल की सुंदरता को प्रभावित कर रही थी। यही वह स्थान है, जहां समय-समय पर भोजली विसर्जन, हसदेव आरती सहित विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक आयोजन होते हैं। ऐसे स्थल की स्वच्छता केवल सफाई का विषय नहीं, बल्कि आस्था, पर्यावरण और सामूहिक जिम्मेदारी से भी जुड़ी हुई है।

सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत ‘सेवा मेरा योगदान’ की पहल ने आज इसी तस्वीर को बदलने का काम किया। जिला प्रशासन की अगुवाई में जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी-कर्मचारी, नगर निगम का अमला, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और आम नागरिक एक साथ नदी घाट पर पहुंचे। किसी के हाथ में झाड़ू थी तो कोई कचरा एकत्र कर रहा था। देखते ही देखते सफाई का यह प्रयास सामूहिक सहभागिता में बदल गया।

जहां गंदगी थी, वहां अब स्वच्छता दिखाई दे रही है

स्वच्छता अभियान से पहले नदी घाट और उसके आसपास कई स्थानों पर कचरा और अनावश्यक रूप से फैली गंदगी दिखाई दे रही थी। सफाई अभियान के दौरान कचरे को हटाया गया और नदी किनारे के क्षेत्र को व्यवस्थित किया गया। अभियान पूरा होने के बाद घाट का स्वरूप बदला हुआ नजर आया। नदी का किनारा पहले की तुलना में अधिक साफ, सुंदर और व्यवस्थित दिखाई देने लगा।

यह बदलाव केवल कचरा हटाने तक सीमित नहीं रहा। सफाई के बाद घाट पर आने वाले नागरिकों के लिए एक बेहतर और स्वच्छ वातावरण दिखाई दिया। धार्मिक आयोजनों के लिए महत्वपूर्ण इस स्थल की गरिमा भी स्वच्छता के साथ और अधिक निखरती नजर आई।

आस्था के साथ स्वच्छता का संदेश

हसदेव-सर्वमंगला नदी घाट कोरबा के महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में शामिल है। यहां भोजली विसर्जन सहित विभिन्न धार्मिक और सामाजिक गतिविधियां आयोजित होती हैं। हसदेव आरती जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों के कारण भी इस घाट से लोगों की आस्था जुड़ी हुई है।

ऐसे में घाट की स्वच्छता का महत्व और बढ़ जाता है। ‘सेवा मेरा योगदान’ के तहत चलाए गए अभियान ने यह संदेश दिया कि आस्था के स्थलों को स्वच्छ रखना भी सामूहिक जिम्मेदारी है। जिस नदी और घाट से लोगों की भावनाएं जुड़ी हैं, उसकी स्वच्छता के लिए समाज का प्रत्येक व्यक्ति अपना योगदान दे सकता है।

अधिकारियों से लेकर आम नागरिकों तक, सभी बने सहभागी

अभियान की सबसे खास बात रही जनभागीदारी। जिला प्रशासन, नगर निगम, विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी, जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और आम नागरिकों ने एक साथ मिलकर सफाई कार्य किया। इससे यह संदेश भी सामने आया कि स्वच्छता किसी एक विभाग या संस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सभी की साझा जिम्मेदारी है।

नगर निगम आयुक्त श्री आशुतोष पांडेय ने नागरिकों से प्रतिदिन कम से कम 15 मिनट स्वच्छता के लिए देने का आह्वान किया। उनका कहना था कि यदि प्रत्येक नागरिक अपने आसपास के क्षेत्र की स्वच्छता में थोड़ा-सा योगदान दे, तो शहर की स्वच्छता व्यवस्था में व्यापक बदलाव लाया जा सकता है।
स्वच्छता के बाद बदला नजरिया भी

किसी सार्वजनिक स्थल की सफाई का वास्तविक असर तब दिखाई देता है, जब वहां आने वाले लोगों के व्यवहार में भी बदलाव आए। हसदेव-सर्वमंगला घाट की सफाई ने इसी सोच को आगे बढ़ाया है। अब आवश्यकता है कि सफाई के बाद यहां दोबारा कचरा न फैले और घाट की सुंदरता को बनाए रखने में नागरिक भी अपनी जिम्मेदारी निभाएं।

स्वच्छ घाट केवल प्रशासन के प्रयास से नहीं बनता। इसके लिए नागरिकों को भी यह संकल्प लेना होगा कि धार्मिक आयोजनों के बाद निकलने वाले कचरे को नदी अथवा घाट पर नहीं छोड़ा जाएगा और सार्वजनिक स्थल को अपने घर की तरह स्वच्छ रखा जाएगा।

‘सेवा मेरा योगदान’ से सेवा की भावना हुई साकार

सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत ‘सेवा मेरा योगदान’ कार्यक्रम ने आज हसदेव-सर्वमंगला घाट पर सेवा की भावना को व्यवहार में उतारने का अवसर दिया। एक ओर जहां जनप्रतिनिधि और अधिकारी सफाई में सहभागी बने, वहीं आम नागरिकों ने भी अपनी जिम्मेदारी निभाई।

अभियान के दौरान स्वच्छता के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली ‘स्वच्छता दीदियों’ उमा पटेल, सरिता मसीह, राजकुमारी पटेल, मीना वर्मा एवं मधु साहू को स्वच्छता किट प्रदान कर सम्मानित किया गया। उपस्थित लोगों ने स्वच्छता की शपथ लेकर अपने आसपास के सार्वजनिक स्थलों को स्वच्छ रखने और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करने का संकल्प लिया।

अब जरूरत है इस बदलाव को बनाए रखने की

आज हसदेव-सर्वमंगला नदी घाट पर सफाई अभियान के बाद जो बदलाव दिखाई दे रहा है, वह इस बात का उदाहरण है कि सामूहिक प्रयास से सार्वजनिक स्थलों की तस्वीर बदली जा सकती है। गंदगी से प्रभावित नदी किनारा अब स्वच्छ और सुंदर नजर आ रहा है। लेकिन इस बदलाव को स्थायी बनाना ही इस अभियान की वास्तविक सफलता होगी।

सेवा संकल्प अभियान ने सफाई के माध्यम से एक सरल संदेश दिया हैकृस्वच्छता केवल एक दिन का अभियान नहीं, बल्कि रोजमर्रा के जीवन की आदत और सामूहिक जिम्मेदारी है।

हसदेव-सर्वमंगला घाट की बदली हुई तस्वीर अब नागरिकों से यही अपेक्षा करती है कि जिस घाट को मिलकर साफ किया गया है, उसकी स्वच्छता को मिलकर बनाए भी रखा जाए। यही ‘सेवा मेरा योगदान’ की भावना को निरंतर आगे बढ़ाने की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम होगा।

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