CRPF का ऐतिहासिक मील का पत्थर: महिला जवानों के 40 साल के गौरवशाली सफर का मनेगा भव्य उत्सव

नई दिल्ली। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) 25 सितंबर को अपनी महिला जवानों के 40 साल के समर्पण और वीरता भरे योगदान का उत्सव मनाएगा। इस मौके पर महानिदेशक जीपी सिंह और सीआरपीएफ फैमिली वेलफेयर एसोसिएशन की अध्यक्ष अनुभवी और सेवारत महिला जवानों को सम्मानित करेंगे। 1986 में सीआरपीएफ ने अपनी पहली महिला कॉम्बैट बटालियन उठाई थी। आज महिलाएं बल के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों की कमान संभाल रही हैं। 2022 में उसी पहली बटालियन की दो महिला अधिकारियों एनी अब्राहम (आईजी, रैपिड एक्शन फोर्स) और सीमा धुंदिया (आईजी, बिहार सेक्टर) को आईजी पद पर पदोन्नत किया गया।
वर्तमान में महिला अधिकारी जम्मू, कोबरा, आरएएफ, पूर्वोत्तर, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे क्षेत्रों की कमान संभाल रही हैं। आईपीएस अधिकारी संजुक्ता पराशर कोबरा (जंगल वॉरफेयर कमांडो यूनिट) की पहली महिला प्रमुख बनीं।
महिलाओं की बढ़ती भूमिका
सीआरपीएफ में छह पूर्ण महिला बटालियन महत्वपूर्ण सुरक्षा क्षेत्रों में तैनात हैं। आरएएफ में 64 महिला टीमें (प्रत्येक में 24 जवान) भीड़ नियंत्रण और दंगा विरोधी कार्यों में लगी हैं। बस्तरिया बटालियन समेत नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी महिलाएं फ्रंटलाइन भूमिका निभा रही हैं।
वीरता के उदाहरण
- कांस्टेबल कमलेश कुमारी: 13 दिसंबर 2001 को संसद हमले के दौरान सबसे पहले अलर्ट बजाया। उन्हें अशोक चक्र (मरणोपरांत) मिला। वे सीआरपीएफ की एकमात्र अशोक चक्र विजेता हैं।
- कांस्टेबल विमला देवी: सेना मेडल।
- लांस नायक राजवंती देवी: 1988 में श्रीलंका के एलिफेंट पास चेकपोस्ट पर भूमिका के लिए आर्मी चीफ की प्रशंसा।
- कांस्टेबल बिंदू कुमरे: 2001 श्रीनगर एयरपोर्ट आतंकी हमले में वीरता पदक।
सीआरपीएफ ने महिला जवानों की भर्ती को ‘अग्रणी कदम’ बताया है, जिसने सुरक्षा ढांचे में महिलाओं के सशक्तिकरण, समान अवसर और परिचालन समावेशिता को नई दिशा दी।
