सदस्य सत्यापन में बीएमएस अग्रणी: एचएमएस की फजीहत, धराशाई हो गए दावे

कोरबा 16 सितंबर। कोरबा जिले के गेवरा-दीपका क्षेत्र में ट्रेड यूनियम एचएमएस एक तरह से अतीत बन कर रह गई है। हाल में ही हुए सदस्य सत्यापन में बीएमएस ने अग्रणी स्थान बनाया तो एचएमएस की फजीहत हो गई। सभी तरह की कोशिश के बाद भी यहां भी नोटा को 38 तो कोयला मजदूर सभा को 49 मत हासिल हुए । वहीं रेशमलाल वाली कोयला मजदूर पंचायत को केवल 5 वोट हासिल हुए।
कोल सेक्टर में सदस्यता सत्यापन को लेकर बीते वर्षो में खेल चलता रहा। उसे इस वर्ष बदल दिया गया। एकल सदस्यता के नियम ने बड़े-बड़े धुरंधरों की हवा गोल कर दी। कामगारों ने अपने काम के लायक लगने वाली ट्रेड यूनियन पर विश्वास जताया। इसके कई अप्रत्याशित नतीजे सामने आये। कुसमुंडा के बाद दीपका क्षेत्र में भी बीएमएस का जलवा रहा। उसने कुल संख्या 1145 के मुकाबले 521 कामगारों का समर्थन हासिल किया।
दूसरे स्थान पर रहे इंटक को 339 का समर्थन मिला। एटक के साथ 193 कामगार आये है। यानी स्थिति ठीकठाक है। ट्रेड यूनियन की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे रेशमलाल यादव के कामगारों ने जोर का झटका दिया। दावों के अनुसार अपनी यूनियन की मजबूती के लिए कई तरह के कोशिश के बाद भी उनके पाले में केवल 5 कामगार ही आ सके। चौथे स्थान पर रही केएमएस को 49 कर्मियों का समर्थन प्राप्त हुआ।
ज्ञात रहे इससे पहले हुए सत्यापन में एसईकेएमएसी इंटक ने 496 कामगारों का समर्थन हासिल कर सबसे अव्वल स्थिति बनायी। जबकि तीन के अंतर के साथ एटक दूसरे स्थान पर रही। जिस तरह के हालात कोरबा जिले में बने हुए हैं, उससे एक बात साफ हुई है कि कामगारों ने नीतियों के बजाय नियत पर विश्वास जताया है। याद रहे एसएमएस संगठन ने अपने अपने तौर तरीके से कोरबा जिले के चार क्षेत्रों के लिए नया प्रयोग किया। लेकिन कामगारों के मन को टटोलने में वे नाकाम रहे।
लोगों के मन में सवाल खड़ा होता होगा कि आखिर कामगारों को काम से मतलब होना चाहिए, यूनियन से क्यों? जानकार बताते हैं कि एसईसीएल या दूसरी कोयला कंपनियों में कामगारों को अपने आर्थिक और सामाजिक हितों के मामले में दिक्कतें झेलनी पड़ती है। आवास से लेकर मरम्मत और मेडिकल बिलों के भुगतान में परेशानी होती है, इसलिए यूनियन का सहारा लेना पड़ता है।
