नई दिल्ली। मानसूनी हवाओं ने पश्चिम से आने वाली शुष्क हवाओं को पीछे धकेल दिया है। इसी बीच मध्य प्रदेश के आसपास बने निम्न दबाव के क्षेत्र के प्रभाव से गुजरात, राजस्थान और मध्य भारत के बड़े हिस्से में बारिश का दौर फिर तेज हुआ है। ऐसे में मानसून की विदाई के लिए जरूरी परिस्थितियां अभी पूरी तरह नहीं बन पाई हैं। बंगाल की खाड़ी में 20 सितंबर के आसपास एक और मौसमी सिस्टम बनने की संभावना है, जो मानसूनी गतिविधियों को आगे भी बनाए रख सकता है। यही कारण है कि इस बार मानसून की वापसी 17 सितंबर से आगे खिसक सकती है। पिछले वर्ष सामान्य तिथि से तीन दिन पहले वापसी की प्रक्रिया शुरू हो गई थी।

बारिश सामान्य से करीब 15 प्रतिशत कम

मौसम विभाग के अनुसार, देश में अभी कुल बारिश सामान्य से करीब 15 प्रतिशत कम है, लेकिन कई राज्यों में कमी 40 से 45 प्रतिशत तक है। ऐसे में सितंबर की बारिश खेती के लिहाज से महत्वपूर्ण हो गई है। पिछले वर्ष पश्चिमी राजस्थान से 14 सितंबर को मानसून की वापसी शुरू हो गई थी। इस बार अभी तक ऐसी स्थितियां नहीं बनी हैं। मौजूदा संकेतों को देखते हुए अगले करीब दस दिनों तक मानसून की वापसी की संभावना कम है।

अगले कुछ दिन मानसून की सक्रियता के लिहाज से महत्वपूर्ण

आईएमडी के अनुसार, उत्तर भारत में अगले कुछ दिन मानसून की सक्रियता के लिहाज से महत्वपूर्ण रहेंगे। हिमाचल से लेकर उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और बिहार तक तराई एवं आसपास के क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।

उत्तराखंड में कुछ स्थानों पर तेज बारिश का खतरा बना रहेगा। हालांकि बारिश पूरे क्षेत्र में एकसमान नहीं होगी और कई जगह इसका स्वरूप खंडित रह सकता है। पंजाब और हरियाणा में शुष्क मौसम रहने की संभावना दिल्ली-एनसीआर में अगले कुछ दिनों में मौसम पूरी तरह शुष्क रहने की स्थिति नहीं है। स्थानीय परिस्थितियों के साथ मानसूनी हवाओं की सक्रियता बढ़ने पर कुछ क्षेत्रों में बारिश हो सकती है। पंजाब और हरियाणा के पश्चिमी हिस्सों में फिलहाल शुष्क मौसम रहने की संभावना है। हालांकि अगले सप्ताह हवाओं की दिशा और नमी की स्थिति से उत्तर भारत में मानसून के ठहराव की तस्वीर और साफ होगी।

Spread the word