खास संयोगः एक ही तिथि में आसीन होंगे गणपति, होगी हरितालिका पूजा

कोरबा 13 सितंबर। दो दशक के बाद इस तरह की स्थिति होगी जबकि हरितालिका व्रत पर शिव पार्वती की पूजा बाद में होगी और इससे पहले विघ्न विनाशक गणपति स्थापित होंगे। 14 सितंबर सोमवार को सरितालिका तीज और गणेश चतुथीं एक ही दिन मनाई जाएगी।

काल गणना की वजह से इस तरह के समीकरण वर्ष 2026 में बने हैं। अद्भुत संयोग से सुबह घर-घर विघ्नविनाशक की स्थापना होगी, जबकि शाम को सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य की कामना के साथ हरितालिका तीज का व्रत और शिव-पार्वती की पूजा करेंगी। मान्य परम्परा के अंतर्गत हरितालिका तीज के अगले दिन गणेश चतुर्थी मनाई जाती है, लेकिन इस वर्ष तृतीया और चतुर्थी तिथि के संयोग के कारण दोनों पर्व एक ही दिन पड़ रहे हैं।

भागवताचार्य पंडित दशरथनंदन द्विवेदी ने ज्योतिषीय गणना के संदर्भ से बताया कि 14 सितंबर को सुबह 7.06 बजे तक तृतीया तिथि रहेगी, इसके बाद चतुर्थी तिथि प्रारंभ ही आएगी। शास्त्रीय मान्यता के अनुसार सूर्योदय के समय तृतीया तिथि होने और दो घटी से अधिक समय तक रहने के कारण हरितालिका तीज का पर्व इसी दिन मान्य होगा। वहीं गणेश चतुर्थी मध्याहन व्यापिनी तिथि होने के कारण गणेशजी की स्थापना और पूजा भी 14 सितंबर को ही की जाएगी। उनके अनुसार करीब 20 वर्ष बाद तीज और गणेश स्थापना के शुभ मुहूर्त बने है।

हरितालिका तीज की पूजा का समय 6.05 से 7.06 बजे तक रहेगा। इस के प्रदोष में भी पूजा कर सकेगी। चतुर्थी तिथि 14 सितंबर सुबह 7.06 बजे से शुरू होकर 15 सितंबर सुबह 7.44 बजे तक रहेगी। श्री द्विवेदी ने कहा कि दोनों पर्व के पूजा काल अलग-अलग होने से व्रती महिलाओं को असमंजस की जरूरत नहीं है। सुबह गणेश प्रतिमा की स्थापना और पूजा के बाद महिलाएं अपना निर्जला व्रत जारी रखेंगी। शाम को प्रदोष काल में शिव पार्वती की पूजा, हरितालिका व्रत कथा और आरती की जाएगी। इस तरह एक ही दिन श्रद्धालु सुबह गणपति और शाम को शिव-पार्वती की आराधना करेंगे।

14 सितंबर को तृतीया तिथि सुबह 7.06 बजे तक है, जिसके बाद चतुर्थी शुरू होगी। तृतीया तिथि के चतुर्थी से युक्त होने के कारण हरितालिका तीज का व्रत और पूजन इसी दिन शाम के प्रदोष काल में करना शास्त्र सम्मत रहेगा। हरतालिका तीज के व्रत का पारण अगले दिन यानी 15 सितंबर मंगलवार को सुबह सूर्योदय के बाद और तिथि के नियमानुसार किया जाएगा।

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