तीन महीने से चना वितरण बंद, टेंडर का इंतजार कर रहे राशन कार्डधारी

कोरबा 11 सितंबर। सरकार की सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले परिवारों को राशन कार्ड के माध्यम से हर महीने 2 किलो चना देने की व्यवस्था है। लेकिन कोरबा जिले में पिछले तीन महीने से चना का वितरण बंद है। बताया जा रहा है कि पूर्व टेंडर की अवधि समाप्त होने के बाद नए टेंडर की प्रक्रिया लंबित है। ऐसे में राशन कार्डधारी लगातार यह सवाल कर रहे हैं कि नया टेंडर कब होगा और उन्हें चना की सुविधा दोबारा कब मिलेगी।

औद्योगिक जिले कोरबा में 3.50 लाख से अधिक बीपीएल परिवार पीडीएस व्यवस्था के तहत पंजीकृत बताए जाते हैं। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के हितग्राही सस्ते राशन के साथ चना की सुविधा भी प्राप्त करते हैं। लेकिन बीते तीन महीने से राशन दुकानों में चना नहीं मिलने से हितग्राहियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। राशन दुकान संचालकों का कहना है कि नागरिक आपूर्ति निगम का पिछला टेंडर समाप्त हो चुका है और नए टेंडर का इंतजार है। नया टेंडर होने के बाद आवंटन प्राप्त होने पर चना का वितरण शुरू किया जाएगा। हालांकि, यह प्रक्रिया कब तक पूरी होगी, इसकी स्पष्ट जानकारी दुकानदारों के पास भी नहीं है।

हितग्राहियों की चिंता केवल मौजूदा तीन महीने के चना को लेकर ही नहीं है, बल्कि उन्हें आशंका है कि लंबित अवधि का कोटा बाद में किस तरह उपलब्ध कराया जाएगा। उनका कहना है कि कई बार टेंडर प्रक्रिया में देरी के कारण महीनों तक सुविधा प्रभावित होती है और बाद में सीमित अवधि का ही राशन उपलब्ध हो पाता है। ऐसे में पिछला लंबित कोटा मिलने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं रहती। हितग्राहियों का कहना है कि रोजमर्रा की मजदूरी और कामकाज छोडकर राशन दुकान के चक्कर लगाना हर किसी के लिए संभव नहीं है। यही वजह है कि लंबे समय तक सुविधा बाधित रहने पर कई लोग अपने लंबित हक की जानकारी लेने में भी रुचि नहीं दिखा पाते।

पीडीएस में बड़ी संख्या में गरीब परिवारों के पंजीयन के बीच वास्तविक पात्र हितग्राहियों के सत्यापन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। जानकारों का कहना है कि जब अधिकांश सरकारी योजनाओं और सेवाओं में आधार आधारित व्यवस्था लागू है तथा हितग्राहियों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति से जुड़ी जानकारी उपलब्ध है, तो पीडीएस में पंजीकृत हितग्राहियों की पात्रता की समय-समय पर समीक्षा क्यों नहीं की जाती। हितग्राहियों का कहना है कि एक ओर पात्र परिवारों को मिलने वाली चना जैसी सुविधा तीन महीने से बाधित है, वहीं दूसरी ओर पात्रता के सत्यापन और लंबित कोटे की स्थिति को लेकर भी स्पष्टता नहीं है। ऐसे में शासन-प्रशासन को टेंडर प्रक्रिया जल्द पूरी करने के साथ ही लंबित चना के कोटे और वास्तविक पात्र हितग्राहियों की स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

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