
कोरबा 11 सितम्बर। बिलासपुर तक आने वाली यात्री ट्रेनों को लेकर कोरबा में एक बार फिर आवाज बुलंद हुई है। कोयला श्रमिक संघ ने रेलवे प्रबंधन से मांग की है कि रीवा-बिलासपुर, इंदौर-बिलासपुर, भोपाल-बिलासपुर और चिरमिरी-बिलासपुर एक्सप्रेस का विस्तार कोरबा एवं हसदेव एक्सप्रेस के परिचालन को गेवरारोड स्टेशन तक किया जाए।
संघ ने इस संबंध में कलेक्टर कोरबा, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधक और क्त्ड बिलासपुर को पत्र भेजकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है। सीआईटीयू के क्षेत्रीय महासचिव वी.एम. मनोहर ने पत्र में कहा है कि वर्तमान में रीवा-बिलासपुर यात्री ट्रेन क्रमांक 18248, इंदौर-बिलासपुर 18233, भोपाल-बिलासपुर 18235 और चिरमिरी-बिलासपुर 18258 बिलासपुर पहुंचकर 10 से 20 घंटे से अधिक समय तक खड़ी रहती हैं। संघ का तर्क है कि इन ट्रेनों का विस्तार कोरबा तक किया जाए तो रेलवे के संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और कोरबा के हजारों यात्रियों को सीधा फायदा मिलेगा।
पत्र में कहा गया है कि कोरबा पश्चिम की करीब 5 लाख आबादी को बेहतर रेल सुविधा मिल सकती है। साथ ही हसदेव एक्सप्रेस 18250/18249 का कोरबा से गेवरारोड तक परिचालन शुरू करने की भी मांग की गई है। सीआईटीयू ने कोरबा को छत्तीसगढ़ का महत्वपूर्ण कोयला औद्योगिक क्षेत्र बताते हुए कहा कि यहां ैम्ब्स् की कोरबा, कुसमुंडा, गेवरारोड और दीपका जैसी बड़ी परियोजनाएं हैं। इन क्षेत्रों में काम करने वाले कर्मचारी और आम लोग बड़ी संख्या में दूसरे जिलों से आते-जाते हैं।
संघ के मुताबिक कोयला क्षेत्रों में लगभग 60 हजार कर्मचारी-अधिकारी कार्यरत हैं। ऐसे में यात्रियों की संख्या को देखते हुए बिलासपुर में लंबे समय तक खड़ी रहने वाली ट्रेनों को कोरबा तक विस्तार देने का औचित्य है। सीआईटीयू का दावा है कि इससे यात्रियों को राहत मिलने के साथ-साथ रेलवे को अतिरिक्त राजस्व भी प्राप्त होगा। सीआईटीयू की दो टूकः जनता को आंदोलन के लिए मजबूर न करें।
पत्र के अंत में संघ ने रेलवे प्रबंधन से कहा है कि कोरबा जिले और कोरबा पश्चिम की जनता की रेल सुविधाओं की कमी से हो रही परेशानी को गंभीरता से लेते हुए जल्द कार्रवाई की जाए। सीआईटीयू ने उम्मीद जताई है कि रेलवे इस मांग पर सकारात्मक निर्णय लेगा और कोरबा की जनता को आंदोलन के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा। अब गेंद रेलवे के पाले में है। सवाल सीधा हैरू जब ट्रेनें बिलासपुर में घंटों खड़ी रहती हैं, तो उन्हें कोरबा तक दौड़ाने में आखिर अड़चन क्या है?
