कुएं में गिरा भालू, 15 घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सुरक्षित निकाला

कोरबा 30 जुलाई। वन परिक्षेत्र केंदई अंतर्गत ग्राम छिंदिया में एक भालू के कुएँ में गिरने की सूचना प्राप्त होने पर वन विभाग की टीम तत्काल घटनास्थल पर पहुँची तथा भालू को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन प्रारंभ किया गया। जानकारी मिलते ही कुएँ के आसपास सुरक्षा घेरा बनाया गया तथा ग्रामीणों को सुरक्षित दूरी पर रहने की समझाइश दी गई, ताकि भालू अधिक तनावग्रस्त न हो और किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो।कुएँ की अधिक गहराई तथा भालू के भयभीत होने के कारण उसे सुरक्षित बाहर निकालना चुनौतीपूर्ण कार्य था।
रेस्क्यू के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखा गया कि भालू को किसी प्रकार की चोट न पहुँचे। वन विभाग की टीम द्वारा उसे बाहर निकालने के लिए विभिन्न उपाय किए गए, किंतु प्रारंभिक प्रयास सफल नहीं हो सके। इसके बाद जेसीबी मशीन की सहायता से कुएँ के एक ओर की मिट्टी खोदकर ढलाननुमा रास्ता तैयार किया गया। साथ ही भालू के बाहर निकलने के लिए कुएँ के अंदर बाँस की मजबूत सीढ़ी लगाई गई। रेस्क्यू स्थल से अनावश्यक भीड़ को हटाकर क्षेत्र को शांत कर दिया गया, जिससे भालू बिना किसी बाधा के स्वयं बाहर निकल सके। लगभग 15 घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद रात्रि करीब 9.30 बजे भालू बाँस की सीढ़ी एवं जेसीबी से तैयार किए गए रास्ते की सहायता से सुरक्षित रूप से कुएँ से बाहर निकल गया तथा समीपस्थ जंगल की ओर चला गया। भालू के सुरक्षित बाहर निकलने के बाद वन विभाग की टीम एवं ग्रामीणों ने राहत की साँस ली।
उक्त रेस्क्यू ऑपरेशन वनमंडलाधिकारी कटघोरा कुमार निशांत के निर्देशन एवं उप वनमंडलाधिकारी संजय कुमार त्रिपाठी के मार्गदर्शन में संचालित किया गया। रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान वन परिक्षेत्र अधिकारी अभिषेक कुमार दुबे, वनपाल शारदा प्रसाद शर्मा, वनपाल मंगल सिंह नायक, वनरक्षक गंगाराम नेताम, वनरक्षक अशोक कुमार श्रीवास, वनरक्षक मुरारी लाल साहू, वनरक्षक प्रहलाद सिदार, हाथी मित्र दल के संदीप उइके एवं भोला यादव सहित स्थानीय ग्रामीण उपस्थित रहे तथा सभी ने रेस्क्यू कार्य में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया। वन विभाग द्वारा ग्रामीणों से अपील की गई है कि किसी वन्यप्राणी के कुएँ, गड्ढे अथवा अन्य स्थान पर फँसने की स्थिति में स्वयं उसके पास न जाएँ, अनावश्यक भीड़ न करें तथा तत्काल वन विभाग को सूचना दें। साथ ही खुले कुओं के चारों ओर मजबूत सुरक्षा दीवार अथवा घेरा बनाने की भी अपील की गई है, जिससे भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
