सड़कों पर आवारा मवेशियों का जमावड़ाः हादसे का खतरा, जिम्मेदारों की उदासीनता बनी चिंता का कारण

कोरबा 28 जुलाई। शहर से लेकर आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों तक मुख्य सडकों पर आवारा मवेशियों का जमावड़ा लगातार गंभीर समस्या बना हुआ है। हालात ऐसे हैं कि सुबह से लेकर देर रात तक शहर की प्रमुख सडकों, कटघोरा मार्ग, नेशनल हाईवे तथा अन्य व्यस्त मार्गों पर बड़ी संख्या में मवेशी बैठे या घूमते हुए आसानी से देखे जा सकते हैं। इससे न केवल मवेशियों की जान खतरे में रहती है, बल्कि वाहन चालकों और राहगीरों के लिए भी हर समय दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
बरसात के मौसम में यह समस्या और अधिक गंभीर हो जाती है। बारिश के कारण दृश्यता कम होने और सडकें फिसलन भरी होने से वाहन चालकों को मवेशियों का समय पर आभास नहीं हो पाता। वहीं रात्रि के समय अंधेरे में अचानक सडक पर बैठे या दौड़ते मवेशियों के कारण वाहन चालकों को ब्रेक लगाने या वाहन मोडने के लिए मजबूर होना पड़ता है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। कई बार वाहन आपस में टकराने की स्थिति भी बन जाती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस समस्या के कारण पहले भी कई सडक दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें लोगों के घायल होने के साथ-साथ मवेशियों की भी मौत हुई है। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। नगर निगम और स्थानीय प्रशासन समय-समय पर अभियान चलाकर सडकों पर घूम रहे मवेशियों को पकडकर कांजी हाउस भेजने की कार्रवाई करते हैं। इसके बावजूद कुछ ही दिनों बाद स्थिति फिर पहले जैसी हो जाती है। इससे स्पष्ट है कि अभियान अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रहे हैं।
आखिर कब होगी गैर जिम्मेदार पशुपालकों पर कार्रवाई
लोगों का मानना है कि केवल मवेशियों को पकडना पर्याप्त नहीं है। जिन पशुपालकों के मवेशी खुले छोड़ दिए जाते हैं, उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। जब तक पशुपालकों की जवाबदेही तय नहीं होगी और उन पर प्रभावी दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी, तब तक सडकों पर मवेशियों का जमावड़ा और उससे होने वाले हादसों पर अंकुश लगाना मुश्किल होगा। शहरवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि नियमित अभियान चलाने के साथ-साथ जिम्मेदार पशुपालकों की पहचान कर उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि सडकें सुरक्षित बन सकें और दुर्घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
