पोड़ी खुर्द सब स्टेशन की लचर व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश, स्थायी समाधान की मांग

कोरबा 24 जुलाई। विकासखंड पोड़ी-उपरोड़ा अंतर्गत ग्राम पोड़ी खुर्द ( कोरबी ) स्थित विद्युत उपकेंद्र (सब स्टेशन) की लगातार बिगड़ती व्यवस्था को लेकर क्षेत्र के ग्रामीणों का आक्रोश अब खुलकर सामने आ गया है। वर्षों से विद्युत आपूर्ति की समस्या झेल रहे लगभग 70 से 100 गांवों के ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और विद्युत विभाग के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक एवं अधीक्षण अभियंता विद्युत विभाग को ज्ञापन सौंपकर तत्काल स्थायी समाधान की मांग की है।

ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि आगामी पांच दिनों के भीतर बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया और स्थायी समाधान नहीं निकाला गया, तो क्षेत्र के हजारों ग्रामीण लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से कोरबी स्थित स्टेट हाईवे (चोटिया-चिरमिरी मार्ग) पर चक्काजाम आंदोलन करेंगे। ग्रामीणों का कहना है कि इस आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन और विद्युत विभाग की होगी। ग्रामीणों ने बताया कि पोड़ी खुर्द सब स्टेशन से जुड़े गांवों में पिछले लगभग सात दिनों से बिजली की आंख मिचौली और हल्की फुल्की बारिश व बिजली चमकने से विद्युत आपूर्ति पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है, लगातार बिजली गुल रहने से पूरा क्षेत्र अंधेरे में डूबा रहता है। घरों में दैनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं, बच्चों की पढ़ाई बाधित हो गई है तथा किसानों और छोटे व्यवसायियों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। ग्रामीणों एवं उपभोक्ताओं का कहना है कि यह कोई नई समस्या नहीं है। वर्षों से पोड़ी खुर्द,सब स्टेशन की लचर व्यवस्था के कारण क्षेत्र में बार-बार बिजली बाधित होती रहती है, लेकिन विभाग द्वारा स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई। हर बार अस्थायी मरम्मत कर समस्या को टाल दिया जाता है, जिससे लोगों का धैर्य अब जवाब देने लगा है।बिजली नहीं रहने का सबसे अधिक असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है।

ग्रामीणों के अनुसार स्वास्थ्य केंद्रों में रखी जीवनरक्षक दवाइयों और वैक्सीन के खराब होने का खतरा बढ़ गया है। बिजली के अभाव में आवश्यक चिकित्सा उपकरण भी संचालित नहीं हो पा रहे हैं, जिससे मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा हैद्यइसके अलावा पेयजल आपूर्ति भी गंभीर रूप से प्रभावित हो गई है। कई गांवों में मोटर पंप बंद होने से लोगों को पीने के पानी के लिए भटकना पड़ रहा है।

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