कोल इंडिया की टॉप 35 खदानों की सूची में कोरबा की तीनों मेगा परियोजना टॉप 3 में शुमार

कोरबा 30 जून। कोल इंडिया की टॉप 35 खदानों की सूची में कोरबा की तीनों मेगा परियोजना टॉप 3 में शुमार है। वित्तीय वर्ष में अब तक सर्वाधिक कोयला उत्पादन के बूते गेवरा लिस्ट में नंबर वन, जबकि दीपका दूसरे और कुसमुंडा परियोजना तीसरे स्थान पर है।
कोयला उत्पादन के आधार पर कोल इंडिया अपने अनुषंगी कंपनियों की टॉप 35 सूची जारी करती है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में एसईसीएल की मेगा परियोजनाएं इस लिस्ट में अग्रणी बनी हुई है। खास बात यह है कि लिस्ट की टॉप 3 खदानें कोरबा जिले में स्थित है। गेवरा एरिया ने 27 जून तक की स्थिति में सर्वाधिक 10.12 मिलियन टन कोयला उत्पादन किया है। सर्वाधिक उत्पादन के कारण लिस्ट में गेवरा पहले पायदान पर है। दूसरे नंबर पर दीपका मेगा परियोजना है। दीपका ने मौजूदा लक्ष्य से अधिक कोयला उत्पादन किया है। एरिया को 27 जून तक 9.85 मिलियन टन कोयला उत्पादन करना था। इसके मुकाबले एरिया से 9.9 मिलियन टन कोयला उत्पादन किया जा चुका है। लिस्ट की तीसरे नंबर की खदान कुसमुंडा मेगा परियोजना ने 8.42 मिलियन टन कोयला उत्पादन कर लिया है। चौथे नंबर पर एमसीएल की एलबीएल इंटीग्रेटेड प्रोजेक्ट है। पांचवे नंबर पर एनसीएल की जयंत ओपन कास्ट माइन है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में टॉप 35 की श्रेणी में सुमार कई खदानों ने खराब प्रदर्शन के कारण अपनी जगह गंवा दी है। हालांकि गत वित्तीय वर्ष में भी टॉप 35 श्रेणी में जिले की मेगा परियोजनाओं का प्रदर्शन बेहतर रहा था। लगातार इस सूची में कोरबा की खदानों का दबदबा बना हुआ है।
एसईसीएल का सर्वाधिक कोयला कोरबा जिले की मेगा परियोजनाओं से ही उत्पादन किया जाता है। वित्तीय वर्ष के पहले तीन माह में मेगा परियोजनाओं के उत्पादन का प्रदर्शन बेहतर रहा है, जो कोल इंडिया की 35 सूची में भी नजर आ रहा है। कोयला उत्पादन के मामले में टॉप 3 कोयला कंपनियों में एमसीएल, एनसीएल और एसईसीएल की गिनती होती है। इन्हीं तीनों कंपनियों के पास सबसे ज्यादा टॉप 35 श्रेणी की खदाने हैं। इन तीन कंपनियों के पास टॉप 35 में से 27 खदानें है। एमसीएल के पास 12, एनसीएल के पास 8 और एसईसीएल के पास 7 टॉप 35 श्रेणी की खदानें है।
