पूर्णिमा पर हुई हसदेव महाआरती, श्रद्धालु हुए शामिल

नदियों को पूजने की परंपरा सदियों से भारत मेंः कामेश्वर

कोरबा 30 जून। ज्येष्ठ महीने की पूर्णिमा को हसदेव महा आरती स्थानीय सर्वमंगला घाट पर की गई। सैकड़ो की संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति कार्यक्रम में रही। उन्होंने नदी संरक्षण को संस्कृति परंपरा का हिस्सा बताया और इस दिशा में अपनी भूमिका का निर्वहन करने का संकल्प लिया।

संस्कार भारती के जिला अध्यक्ष कामेश्वरधर दीवान मुख्य यजमान थे। वित्तीय सलाहकार आशीष श्रीवास्तव, कोरबा कंप्यूटर कॉलेज के डायरेक्टर राजेश अग्रवाल और आदित्य वाहिनी के अध्यक्ष संदीप शर्मा विशिष्ट यजमान के रूप में शामिल हुए। महा आरती से पहले पुरोहितों ने वैदिक अनुष्ठान संपन्न कराया। यज्ञ विधान की पूर्ति भी यहां पर की गई। नमामि हसदेव के संस्थापक रणधीर पांडेय ने हसदेव महा आरती की अवधारणा और उद्देश्य को स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि दुनिया में यूं तो कई देश है लेकिन केवल भारत और नेपाल में नदियों को पूजने की परंपरा रही है। इसके पीछे ठोस आधार हैं। हमारा मानना है कि भूमि, जल और वायु तत्व को हमेशा तेजोमय बनाए रखना है। स्वाभाविक सी बात है कि इनके कारण ही जीवन गतिशील होता है और लोगों की आवश्यकता पूरी होती हैं। क्या कोई इन तत्वों के बिना जीवन की कल्पना कर सकता है। इसी विचार को ध्यान में रखते हुए नदी संरक्षण को लेकर हमने काम प्रारंभ किया।

मुख्य यजमान और बिजली बोर्ड की कोरबा परियोजना के पूर्व केमिस्ट कामेश्वरधर दीवान ने नमामि हसदेव के उद्देश्य पूर्ण प्रयासों का नमन किया और कहा की जब बहुत सारे लोग सामाजिक सरोकार और अपनी जिम्मेदारियां से ऐसे अभियान का हिस्सा बनते हैं तो नदियों का संरक्षण होना सुनिश्चित होता है। इसलिए और भी लोगों को इस मामले में अपनी संवेदनशीलता दिखानी चाहिए। इस कार्यक्रम में शासकीय महाविद्यालय की प्राध्यापक अर्चना दीवान, वर्षा श्रीवास्तव, ज्योति शर्मा, सहित काफी संख्या में जागरूक लोक उपस्थित है।

Spread the word