कही-सुनी (28 JUNE-26) : रवि भोई

साय सरकार के लिए निर्णायक होगा जुलाई का मही
ना

माना जा रहा है कि जुलाई का महीना छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार के लये निर्णायक हो सकता है। 13 से 17 जुलाई तक छत्तीसगढ़ का मानसून सत्र है। इसके बाद सरकार में उलटफेर की संभावना है। कहा जा रहा है कि तब तक राष्ट्रीय टीम भी बन जाएगी और केंद्रीय मंत्रिमंडल का नया स्वरूप सामने आ जाएगा। प्रदेश के नेता एंटीकम्बेंसी फैक्टर को दूर करने की कवायद में लगे हैं। इसके लिए मंथन और विमर्श लगातार चल रहा है। 18 जुलाई के बाद परिदृश्य साफ़ होने के आसार हैं। बिजली बिल में बढ़ोत्तरी और खाद की कमी सरकार पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहे हैं तो कुछ भाजपा विधायकों की कार्यशैली भी बीजेपी की छवि पर असर डाल रही है। कहा जा रहा है कि संगठन और सरकार में सर्जरी कर नकारात्मक प्रभाव को खत्म करने की रणनीति बनाई जा रही है। हल्ला है कि सरकार और संगठन में बदलाव करते वक्त नई पीढ़ी को ही तव्वजो दी जाएगी। सरकार और संगठन में पुराने विधायक या नेता को स्थान मिल पाने की गुंजाइश कम बताई जा रही है।

कौन बनेगा जल संसाधन का ईएनसी ?
जल संसाधन विभाग के प्रभारी ईएनसी शंकर ठाकुर 30 जून को रिटायर होने वाले हैं, ऐसे में विभाग में चर्चा चल पड़ी है कि अगला प्रभारी ईएनसी कौन होगा ? जल संसाधन विभाग के कोई भी मुख्य अभियंता फिलहाल ईएनसी की पात्रता नहीं रखते हैं। इस कारण सरकार को किसी एक मुख्य अभियंता को ही प्रभारी ईएनसी बनाना पड़ेगा। अभी महानदी परियोजना के मुख्य अभियंता मक्सी कुजूर का नाम प्रभारी ईएनसी के लिए आगे चल रहा है, पर दौड़ में हसदेव कछार के मुख्य अभियंता जितेंद्र कुमार नेताम,हसदेव गंगा कछार के मुख्य अभियंता अनिल कुमार खलखो,महानदी गोदावरी कछार के मुख्य अभियंता सतीश कुमार टीकम और गोदावरी कछार के मुख्य अभियंता एलेक्जेंडर ग्राहम भी हैं। 30 जून को ही मिनीमाता (हसदेव ) बांगो परियोजना के मुख्य अभियंता शंकर राव सोनाने भी रिटायर हो रहे हैं। सरकार को वहां भी मुख्य अभियंता की पोस्टिंग करनी पड़ेगी। विभाग में इन पांच अफसरों के अलावा कोई चीफ इंजीनियर नहीं हैं, इस वजह से कहा जा रहा किसी वरिष्ठ अधीक्षण अभियंता को मुख्य अभियंता का प्रभार दे दिया जाय। ईएनसी और एक चीफ इंजीनियर की पोस्टिंग के चलते जल संसाधन विभाग में जुलाई महीने में बड़ा बदलाव हो सकता है।

जेब भरने में लगे हैं जल संसाधन के एसई साहब
कहते हैं जल संसाधन के एक अधीक्षण अभियंता (एसई) रिटायरमेंट के पहले जेब भरने में लगे हैं। बताते हैं साहब एक-दो महीने के भीतर ही रिटायर होने वाले हैं। जाते -जाते साहब सब कुछ समेट लेना चाहते हैं। सुनने में आ रहा है कि एसई साहब हर फाइल और हर काम के लिए चढ़ावा चाहते हैं। एसई साहब की डिमांड से त्रस्त होकर ठेकेदारों ने तो कन्नी काट ही ली है, उनके मातहत अफसरों ने भी फाइल भेजना बंद कर दिया है। अफसर और ठेकेदार एस ई साहब के रिटायरमेंट का इंतजार कर रहे हैं। चर्चा है कि एस ई साहब विभाग के एसडीओ से अंडर गारमेंट तक भी खरीदवाने से नहीं चूकते।

मंत्री जी का दिल्ली चक्कर
कहते हैं कि छत्तीसगढ़ के एक मंत्री जी पिछले एक महीने में कई बार दिल्ली का चक्कर लगा आए। अब लोगों को समझ में नहीं आ रहा है कि मंत्री जी सरकारी काम से दिल्ली का चक्कर लगा रहे या फिर संगठन के काम से। सुनने में आ रहा है कि अपने दिल्ली दौरे में मंत्री जी एक-दो बार बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन से भी मुलाक़ात की। नितिन नबीन जल्द ही अपनी टीम बनाने वाले हैं। नितिन नबीन जी छत्तीसगढ़ के प्रभारी रह चुके हैं, ऐसे में मंत्री जी पुरानी जान-पहचान के चलते राष्ट्रीय अध्यक्ष से मिले या फिर कोई और कारण है, यह चर्चा में है। हल्ला तो यह है कि विष्णुदेव साय मंत्रिमंडल का एक सदस्य नितिन नबीन जी की टीम में जा सकते हैं। अब देखते हैं कौन राष्ट्रीय टीम में जाता है, या फिर यह केवल शिगूफा है।

कहाँ अटक गई आईपीएस की लिस्ट ?
लंबे समय से आईपीएस अफसरों की तबादला लिस्ट का इंतजार किया जा रहा है। आमतौर पर जून महीने में आईपीएस अफसरों की एक तबादला लिस्ट आती ही है। कई जिलों में एसपी ढाई-पौने तीन साल से जमे हैं। इस कारण कई जिलों के एसपी में हेरफेर की अटकलें लगाई जा रही है। सारंगढ़-बिलाईगढ़ के एसपी के केंद्रीय प्रतिनियुक्ति में जाने के कारण जिला खाली हो गया है। बलौदाबाजार- भाटपारा जैसा संवेदनशील जिला प्रभारी एसपी के भरोसे चल रहा है। सरकार ने आईपीएस सुंदरराज पी. के केंद्रीय प्रतिनियुक्त पर जाने के कारण बद्रीनारायण मीणा को बस्तर आईजी बना दिया। बद्री मीणा पहले भी कई रेंज में आई जी रह चुके हैं। चर्चा है कि कई जिलों में समीकरण नहीं बैठ पाने के कारण एसपी की तबादला सूची लटकी है। बाजार में एसपी की पोस्टिंग के लिए रेट भी तैर रहे हैं। एक औद्योगिक जिला मुख्यालय के एसपी के लिए सात खोखा, तो एक संभागीय मुख्यालय के एसपी के लिए तीन खोखा की चर्चा गर्म है।

उमेश पटेल से राहुल की चर्चा के मायने क्या ?
कहते हैं कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने खरसिया के विधायक और पूर्व मंत्री उमेश पटेल से अकेले में चर्चा की। कांग्रेस हलकों में इस चर्चा के मायने अलग-अलग निकाले जा रहे हैं। उमेश पटेल नक्सली हिंसा में शहीद नंदकुमार पटेल के पुत्र हैं। नंदकुमार पटेल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रहते शहीद हुए। अब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के कार्यकाल को तीन साल हो गए हैं, तो नए प्रदेश अध्यक्ष की बात चल रही है। राहुल गांधी से चर्चा के बाद प्रदेश अध्यक्ष के लिए उमेश पटेल का नाम उछलने लगा है। नेता प्रतिपक्ष के लिए भी उमेश पटेल का नाम सामने आया था, पर डॉ चरणदास महंत नेता प्रतिपक्ष बने। वैसे प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में पूर्व उपमुख्यमंत्री टी एस सिंहदेव भी शामिल बताए जाते हैं। पर कुछ लोगों का मानना है कि नेता प्रतिपक्ष ओबीसी हैं तो कांग्रेस हाईकमान प्रदेश अध्यक्ष के लिए किसी आदिवासी नेता पर ही दांव खेलेगा।

मंत्रियों के टारगेट में तीन अफसर
कहते हैं कि कुछ मंत्रियों ने 18 जून की बैठक में तीन अफसरों को निशाने पर लिया और उनकी बात न सुनने की शिकायत मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल और प्रदेश संगठन मंत्री पवन साय से की। बताते हैं कि तीन अफसरों में दो आईएएस और एक आईपीएस हैं। 18 जून को मुख्यमंत्री ने अपने मंत्रियों की आकस्मिक बैठक बुलाई थी, जिसमें अजय जामवाल और पवन साय भी मौजूद थे।

कुछ कलेक्टर बदलने की हवा
कहा जा रहा है कि जुलाई के पहले हफ्ते में चार-पांच जिलों के कलेक्टर बदल सकते हैं। चर्चा है कि इस फेरबदल में कई बड़े जिले प्रभावित हो सकते हैं। सुनने में आ रहा है कि रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, कांकेर और कुछ अन्य जिलों के कलेक्टर इधर से उधर हो सकते हैं। कलेक्टरों के साथ मंत्रालय स्तर पर भी छोटा बदलाव हो सकता है। 

(लेखक पत्रिका समवेत सृजन के प्रबंध संपादक और स्वतंत्र पत्रकार हैं।)

Spread the word