कही-सुनी @ रवि भोई

कही-सुनी (07 JUNE-26) : रवि भोई
बीजेपी के लिए खतरे की घंटी
हाल ही में नगरीय निकाय और पंचायतों के उप चुनाव में कांग्रेस को जीत मिली है, उसे भाजपा के लिए खतरे की घंटी माना जा रहा है। शहरी इलाकों में बीजेपी की पकड़ मजबूत मानी जाती है, फिर भी नगरीय निकाय के पांच अध्यक्षों के लिए हुए उप चुनाव में कांग्रेस ने दो पर कब्ज़ा जमा लिया। पार्षदों के 71 पदों के लिए हुए उपचुनाव में भाजपा को 39 सीटें मिली। कांग्रेस के 30 पार्षद जीतकर आ गए। पंचायतों में गैर दलीय आधार पर चुनाव हुए, लेकिन पंचायतों के नतीजों से कांग्रेस गदगद है। नगरीय निकाय के चुनाव में सबसे बड़ी बात यह है कि बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव के विधानसभा क्षेत्र जगदलपुर में ही कांग्रेस पार्षद की जीत हो गई। सूरजपुर जिले के शिवनंदनपुर नगर पंचायत में भले बीजेपी का अध्यक्ष चुनकर आ गया, पर बहुमत कांग्रेस पार्षदों का है। बताते हैं नगरीय निकाय चुनाव में भाजपा के कई नेता और मंत्री लगे थे, इसके बाद भी बीजेपी को क्लीन स्वीप न मिलना, सोचनीय है। राज्य में विष्णुदेव साय की सरकार को ढ़ाई साल हो गए हैं। 2023 में सत्ता में आने के बाद बीजेपी ने लोकसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन किया और नगरीय निकाय और जिला पंचायतों-जनपदों में भी दबदबा बनाया। राज्य के करीब-करीब सभी शहरी निकायों और पंचायतों में ट्रिपल इंजन की सरकार है। आमतौर पर उपचुनावों में सत्तारूढ़ दल के प्रत्याशी की ही जीत होती है। लोग सत्ता की विपरीत धारा में बहते नजर नहीं आते, पर नगरीय निकाय उपचुनाव के नतीजे कुछ और ही बयां कर रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सुशासन तिहार के माध्यम से जनता की नब्ज पकड़ने की कोशिश कर रहे हैं। वे गांव-गांव पहुंचकर लोगों के दुख -दर्द के सहभागी बन रहे हैं, पर नगरीय निकाय और पंचायत उपचुनाव के नतीजे जिस तरह आएं हैं, उससे लग रहा है कि सरकार को काम करने का तौर-तरीका बदलना होगा और लोगों की समस्याओं के इलाज के लिए जल्दी ही कदम उठाना पड़ेगा।
पवन साय का बढ़ेगा कद
छत्तीसगढ़ बीजेपी के संगठन महामंत्री पवन साय के प्रमोशन की चर्चा है। कहते हैं कि पवन साय को जल्द ही क्षेत्रीय संगठन महामंत्री बनाकर कम से कम दो राज्यों की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। कहा जा रहा है कि पश्चिम बंगाल चुनाव में पवन साय के प्रभार वाले इलाके में बीजेपी का परफार्मेंस काफी अच्छा रहा। इसका पुरस्कार पवन साय को मिलेगा ही। छत्तीसगढ़ बीजेपी ने पवन साय के संगठन महामंत्री के कार्यकाल में 2023 के विधानसभा चुनाव में अच्छा प्रदर्शन कर राज्य में सरकार बनाने में सफल रही। इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा राज्य की 11 लोकसभा सीटों में से 10 सीटें जीतने में कामयाब रही। इसके बाद नगरीय निकाय और पंचायत चुनावों में भी बीजेपी को जबरदस्त सफलता मिली। संगठन महामंत्री के तौर पर पवन साय ने छत्तीसगढ़ बीजेपी को नई ऊंचाई पर पहुँचाया, इस कारण उनका कद बढ़ना तय माना जा रहा है।
मंत्री जी की चंदा उगाही चर्चा में
राज्य के एक मंत्री जी की चंदा उगाही आज कल सुर्ख़ियों में है। कहते हैं मंत्री जी ने अपने बच्चे की शादी की तो अपने विभाग के अफसरों को टारगेट दे दिया, फिर अपने इलाके में एक धार्मिक आयोजन करवाया तो फिर लक्ष्य दे दिया। बताते हैं कि धार्मिक आयोजन के लिए विभाग के जिला अधिकारियों को 10-10 लाख तक धन की व्यवस्था का फरमान दिया था। जिला अधिकारियों ने अपना सिर दर्द मातहत अफसरों पर डाल दिया। इन मंत्री जी के बारे में चर्चा है कि वे 40 फीसदी तक कमीशन लिए बिना कोई विभागीय टेंडर और अन्य काम की मंजूरी नहीं देते। मंत्री जी के कमीशन प्रेम से विभाग का भट्टा बैठा जा रहा है और जनता परेशान है। वैसे जब भी मंत्रिमंडल में फेरबदल का हल्ला शुरू होता है, हटाए जाने वालों में इन मंत्री जी का नाम उसमें शामिल रहता है।
मजबूत पकड़ वाले कलेक्टर साहब
कहते हैं कि राज्य के एक कलेक्टर साहब से एक सांसद और एक विधायक भारी नाराज हैं और कलेक्टर को हटाने के लिए सांसद और विधायक जी पूरा जोर भी लगा रहे हैं, पर कलेक्टर साहब हैं कि अंगद के पांव की तरह जमे हैं। खबर है कि कलेक्टर साहब सांसद और विधायक जी की बैठकों में भाग नहीं लेते, वे अपना प्रतिनिधि भेज देते हैं। बैठकों में कलेक्टर साहब को गैरहाजिर पाकर सांसद और विधायक जी अपना भड़ास निकालते हैं। बताते हैं कलेक्टर को हटवाने के लिए सांसद और विधायक जी ने भाजपा संगठन से एप्रोच भी किया है, पर अब तक बात बनी नहीं है। सुनने में आ रहा है कि कलेक्टर साहब को राज्य के एक मंत्री जी का आशीर्वाद प्राप्त है। हल्ला है कि कलेक्टर साहब का राजनीतिक आधार काफी मजबूत है। इस कारण सांसद और विधायक महोदय की नाराजगी के बावजूद कलेक्टर साहब बड़े जिले में राज कर रहे हैं।
प्रशासनिक फेरबदल से खफा मंत्री
कहते हैं पिछले महीने हुए व्यापक प्रशासनिक फेरबदल से राज्य के कुछ मंत्री खफा हैं और मुख्यमंत्री के सामने आपत्ति भी दर्ज कराई है। बताते हैं प्रशासनिक फेरबदल करने से पहले मंत्रियों से न तो पूछा गया और न ही उनकी राय ली गई। खबर है कि कुछ अफसरों ने लिस्ट बनाई और मुख्यमंत्री से मंजूरी ले ली। बताते हैं कि कुछ मंत्रियों के विभागों में ऐसे अफसरों की पोस्टिंग कर दी हैं, जिन्हें वे पसंद नहीं करते। अब मंत्री और अफसरों में टकराव शुरू हो गया है। एक मंत्री के पसंदीदा सचिव को उनके विभाग से हटा दिया गया। इससे मंत्री बड़े नाराज बताए जाते हैं। एक मंत्री की अपने विभागाध्यक्ष से बढ़िया तालमेल बैठ गया था। अब उस विभाग में ऐसे अफसर को सचिव के तौर पर पदस्थ कर दिया गया है, जो विभागाध्यक्ष पर नकेल कसने का काम कर रहे हैं। इससे मंत्री जी का काम अटक सा गया है। इससे मंत्री जी बड़े दुखी बताए जाते हैं।
(लेखक पत्रिका समवेत सृजन के प्रबंध संपादक और स्वतंत्र पत्रकार हैं।)
