तेलंगाना: कल, आज और कल @ डॉ. सुधीर सक्सेना

स्थापना दिवस 2 जून पर विशेष

तेलंगाना: कल, आज और कल

• डॉ. सुधीर सक्सेना
‘2’ का अंक तेलंगाना का शुभांक है। शुभ इस नाते कि आज से बारह साल पह‌ले दो जून को वर्तमान तेलंगाना अस्तित्व में आया था। यूं तो तेलंगाना पहले भी था, अलबत्ता उसके पृथक प्रांत के तौर पर मानचित्र में उभरने के पीछे रक्त और स्वेद की लंबी लोमहर्षक गाथा छिपी है। तेलंगाना का इतिहास प्राचीन है, मगर वर्तमान स्वरुप अर्वाचीन। यहां की धरती उर्वरा है और रत्नगर्भा भी। उसने कोहेनूर समेत नायाब हीरों की नेमते दी हैं। कोल और लौह अयस्क सौंपे हैं और खूब गुल खिलाये हैं। निजाम और अन्य राजवंशों की शानोशौकत अब इतिहास के पन्नों की कथावस्तु है। वह स्थापत्य में प्रतिबिंबित है। हैदराबाद सुच्चे मोतियों का बड़ा बाजार है। यूं तो तेलंगाना तेलुगुभाषी है, लेकिन ठेठ दक्खनी का ठाठ वहां देखने को मिलता है। हैदराबादी तहजीब ‘बाजार’ जैसी फिल्मों में उभरती है। निजाम-दर-निजाम, राजा किशन परसाद, बद्री विशाल पित्ती और मख्दूम जैसी शख्सियतें, वारंगल फोर्ट, चारमीनार, रामप्पा मंदिर, ताज फलकनुमा होटल, सालारजंग म्यूजियम, साइबर सिटी यानि साइबराबाद और अनेक मध्य‌युगीन व आधुनिक संरचनाएं इसके सौंदर्य और वैभव में चार चांद लगाती हैं। यहां के दस्तर-ख्वान की तो बात ही क्या? वह आस्वाद से आह्लाद और तृप्ति तक का मनभावन फलसफा है।
तेलंगाना की धरती जरखेज है। तेलंगाना यूं ही नहीं लुभाता। यहां से जुड़े नामों की एक चमकीली फेहरिस्त है। हँसते हुये नूरानी चेहरों, तालीम, चिकित्सा, क्रीड़ा और मनोरंजन का मरकज है हैदराबाद। सीके नायडू, नायडू, गुलाम अहमद, अब्बास अली बेग, आबिद अली, शिवलाल यादव, अरशद अयूब, वी. राजू, नोएल डेविड, पीवी सिंधु, साइना नेहवाल, फुलेला गोपीचंद, निखत जरीन, एशा सिंह, गगन नारंग, मोहम्मद अजहरुद्‌दीन, वीवीएस लक्ष्मण, मिताली राज, मो. सिराज, तिलक वर्मा, सानिया मिर्जा आदि का ताल्लुक यहां से है। विवेक ओबेराय, तब्बू, सुष्मिता सेन, दीया मिर्जा, अजीत, अमजद खान जैसे सितारे यहां जनमें या जुड़े रहे। तेलुगु सिनेमा यानि टालीवुड की वैश्विक सिनेमा में अलग प्रतिष्ठा है। अल्लू अर्जुन यहां के चहेते सितारा हैं; पुष्पा 2 के लिये प्रशंसित स्टार। तेलुगु फिल्मों के लिये सिनेमाघरों में भीड़ उमड़ती है। रामोजी फिल्म सिटी सिने उद्योग का बड़ा केन्द्र है और आमोद स्थल भी। यहां की ‘लोगां की बातां’ मार्का जुबान का जवाब नहीं वह लुभाती है और बरबस दिल में उतर जाती है। हैदराबाद नमस्कारम् करता है और आदाब और सलाम भी।
तेलंगाना का इतिहास आरोह-अवरोह और घुमावों से भरा है। निजाम की कंजूसी के किस्से हैं और उदारता के प्रसंग भी। आचार्य विनोबा के भूदान यज्ञ से चर्चा और सुर्खियों में आया पोचमपल्ली इसी तेलंगाना में है। पारंपरिक पोचमपल्ली इकत साड़ियों और हथकरघा बुनाई के लिये वह जग विख्यात है। यह दुर्भाग्य की बात है कि स्वराजयन के डेक्कन के इस मह‌त्वपूर्ण और जरखेज सूबे के बारे में ज्यादा नहीं जानता। उसे रजाकारों और किसान आंदोलन के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं। सन 1946 से 1951 के दरम्यान पुचलपल्ली सुंदरैया के नेतृत्व में सामंतों और कुलको के विरुद्ध विद्रोह का भारत के कृषक आंदोलन में महत्वपूर्ण स्थान है। आज कितनों की स्मृति में प्रो. कोटपल्ली जयशंकर और मल्लू स्वराजयम जीवित हैं? त्याग-बलिदान, सेवा और संघर्ष अभिलेखन मांगते हैं। तेलंगाना के अस्तित्व में आने की लोमहर्षक गाथा भी क्रमवार और प्रामाणिक डाक्यूमेंटेशन की मोहताज है।
तेलंगाना ने मुल्क की सियासत को नायाब सितारे दिये हें। इनमें अग्रणी नाम है पामूलपर्ती वेंकट नरसिंहराव का है। वह विषम काल में भारत में प्रधानमंत्री रहे और बहु‌भाषिकता, विद्धता और आर्थिक सुधारों के लिये जाने गये। बीआरएस के के. चंद्रशेखर राव के दस वर्षीय शासन के बाद अनुमुला रेवंत रेड्‌डी तेलंगाना के द्वितीय मुख्यमंत्री हैं। राजनीति में वह पेशकदेमी और प्रत्युत्पन्नमति के लिये जाने जाते हैं। सात दिसंबर, सन 2023 को मुख्यमंत्री बने 56 वर्षीय रेवंत मल्काजगिरि से सांसद भी रह चुके हैं। वह कोडंगल से अनेकशः निर्वाचित होकर असेंबली में पहुंचे हैं। उन्होंने पहलेपहल सन 2007 में स्थानीय निकाय का चुनाव लड़ा था और सीढ़ी-दर-सीढ़ी इस प्रतिष्ठा पद तक पहुंचे। जून 2021 में प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और अनहोनी को होनी में बदल दिया। सीएम पद की शपथ लेने के दस दिनों के भीतर उन्होंने दो गारंटियां लागू कर अपना वचन निमाया। ये गारटियां थीं महिलाओं के लिए निःशुल्क बस सेवा और आरोग्यश्री स्कीम का दस लाख तक विस्तार। उनकी प्रजापालन योजना में एक करोड़ से अधिक अर्जियां आईं। तदंतर जुलाई में उन्होंने किसानों की कर्ज माफी के लिये रू. 31,000 करोड़ का फंड रिलीज किया। इससे करीब 40 लाख किसान लाभान्वित हुये। दो साल पहले स्थापना का दशक समारोह मनाने के बाद रेवंत दिल्ली गये और नितिन गडकरी, पीयूष गोयल, अमित शाह और जेपी नड्डा से मिले ताकि तेलंगाना के विकास को गति मिले। वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मिले और श्रवणापल्ली कोयला खदान सिंगारेनी कंपनी को देने की प्रार्थना की। प्रगति के रथ के पहियों को गति के प्रयोजन से वह अमेरिका के दौरे पर भी गये और एक हद तक निवेश लाने में सफल रहे। रेवंत रेड्डी दक्खिन भारत में कांग्रेस के पुरुषार्थी नायक माने जाते हैं। वह राहुल और सोनिया के लाड़ले नेता हैं। कांग्रेस को जहां अपने इस योद्धा से अनेक उम्मीदें हैं, वहीं तेलंगाना की जनता उनसे प्रदेश के सर्वांगीण विकास की अपेक्षा रखती है। हर कोई जानता है कि आज का समवेत उपक्रम तेलंगाना के बेहतर कल का हेतु बनेगा।
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