वायु प्रदूषण जनस्वास्थ्य के लिए बनी गंभीर समस्या

कोरबा 31 मई। जिले में वायु प्रदूषण की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार और वाहनों की बढ़ती संख्या के कारण जिले की वायु गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इसका सीधा असर आम नागरिकों के स्वास्थ्य पर दिखाई देने लगा है। विशेष रूप से श्वसन संबंधी बीमारियों, एलर्जी, अस्थमा तथा फेफड़ों से जुड़ी अन्य समस्याओं के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है। चिकित्सकों का मानना है कि लंबे समय तक प्रदूषित वातावरण में रहने से बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों को सबसे अधिक नुकसान पहुंच रहा है।

कोरबा को देश के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में गिना जाता है। यहां स्थित एनटीपीसी, सीएसईबी और भारत एल्युमिनियम कंपनी (बालको) सहित कई बड़े एवं मध्यम उद्योगों से उत्सर्जित होने वाली फ्लाई ऐश वायु प्रदूषण का एक प्रमुख कारण मानी जाती है। इसके अलावा कोयला खदानों और औद्योगिक इकाइयों से जुड़े परिवहन कार्यों में लगे भारी वाहनों की लगातार आवाजाही भी समस्या को बढ़ा रही है। जिले की अनेक सडकों पर दिन-रात दौडने वाले हजारों वाहनों से उडने वाली धूल (डस्ट) आसपास के वातावरण को प्रभावित कर रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि वायु प्रदूषण के लिए जिम्मेदार विभिन्न कारकों पर प्रभावी नियंत्रण नहीं होने के कारण स्थिति लगातार चिंताजनक बनी हुई है। फ्लाई ऐश के सुरक्षित निस्तारण, सडकों की नियमित सफाई, पानी का छिडकाव, हरित क्षेत्र के विस्तार तथा औद्योगिक इकाइयों में प्रदूषण नियंत्रण मानकों के कड़ाई से पालन की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है। हालांकि समय-समय पर विभिन्न एजेंसियों और संबंधित संस्थानों द्वारा प्रदूषण नियंत्रण को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर अपेक्षित परिणाम दिखाई नहीं दे रहे हैं।

पर्यावरण से जुड़े जानकारों का मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी और ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। इसलिए केवल योजनाओं और घोषणाओं तक सीमित रहने के बजाय प्रदूषण नियंत्रण के लिए व्यावहारिक उपायों को प्राथमिकता देने की आवश्यकता है। जनस्वास्थ्य की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रशासन, उद्योगों तथा आम नागरिकों को मिलकर जिम्मेदारी निभानी होगी, तभी कोरबा को स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण उपलब्ध कराया जा सकेगा।

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