कर्नाटक : डीके शिवकुमार के सीएम होने के मायने@ डॉ. सुधीर सक्सेना

कर्नाटक : डीके शिवकुमार के सीएम होने के मायने
• डॉ. सुधीर सक्सेना
गुरूवार, 28 मई को अंतत: कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर सियासत की दरोदीवार पर अटकलों और कयासों के सब्ज़े उगने का दौर तब थम गया, जब मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने पद से इस्तीफा देने का ऐलान किया। इसके लिये उन्होंने अपने मंत्रिमंडलीय सहयोगियों को अपने सरकारी आवास पर सुबह के नाश्ते पर आमंत्रित किया और बीते तीन साल में उनके सहयोग के लिए आभार जताते हुये कहा कि वह अपरान्ह तीन बजे इस्तीफा देने राजभवन जाएंगे। उन्होंने कांग्रेस विधायकों से जब उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को सहयोग की बात कही, तो यह स्पष्ट हो गया कि शिवकुमार उनके उत्तराधिकारी होंगे। मई का महिना शिवकुमार के लिए बड़ा मायने रखता है। उनका जन्म आज से चौसंठ साल पहले 15 मई को कनकपुरा में हुआ था और सन 2023 में मई माह में ही उनके अथक प्रयासों से बीजेपी की येदियुरप्पा- सरकार को अपदस्थ कर कांग्रेस की सत्ता में वापसी हुई थी। यह दीगर है कि जीतोड़ कोशिशों के बाद डीकेएस तब सीएम नहीं बन सके थे और उनसे वरिष्ठ और अनुभवी सिद्धारमैया ने बज़िद बाजी मार ली थी। बहरहाल, 28 मई को डीकेएस को सुबह का ब्रेकफास्ट उनके अपने जन्मदिन और कांग्रेस सरकार की सालगिरह के समारोह के नाश्तों से अधिक सुखद और लज्जतदार लगा होगा, क्योंकि इस रोज उनका पालित सपना या साध पूरी हुई।
डीकेएस यानि डोडालाहल्ली केंपेगौड़ा शिवकुमार कर्नाटक के शीर्षस्थ नेताओं में शुमार हैं। वह धनाढ्य हैं, लोकप्रिय हैं, जुझारू और दबंग हैं और कुशल रणनीतिकार हैं। वह महत्वाकांक्षी हैं। करीब चार दशकों का उनका सियासी सफर दिलचस्प और घटनाप्रधान रहा है। वह खांटी कांग्रेसी हैं और सोनिया गांधी के प्रति उनके मन में गहरा सम्मान है। तीन साल पहले कर्नाटक में सत्ता में कांग्रेस की वापसी पर उन्होंने सोनियाजी से अपना कौल निभाने की बात कही थी। डीकेएस का कॉन्फिडेंस लेबेल गज़ब का है। उन्हें जायंट-किलर यूं ही नहीं माना जाता। पहलेपहल उन्हें इस विशेषण से तब नवाजा गया था, जब सन 1989 में सथानूर से एचडी देवेगौड़ा को हराया था। इसी क्रम में उन्होंने एचडी कुमारस्वामी, पीजीआर सिंधिया और अनिता कुमार स्वामी को भारी मतों के अंतर से परास्त किया। देवेगौड़ा परिवार की त्रयी को हराने की तिकड़ी उनके खाते में दर्ज है। सन 2018 में उनकी जीत का अंतर अस्सी हजार से अधिक मतों का था। सन 2019 की भगवा लहर में भी वह अपने भाई डीके सुरेश को लोकसभा के लिए जिताने में कामयाब रहे। उनकी ब्यूह रचना का लोहा उनके विरोधी भी मानते हैं। वह कुबेर राजनेता हैं और सन 2018 में चुनावी हलफनामे में उन्होंने 840 करोड़ की संपत्ति दर्शाई थी।
डीकेएस का जीवन संघर्षों से बिंधा रहा है। सन 2017 में उनके दफ्तरों, ठिकानों और बिड़दी में ईगलटन गोल्फ रिजार्ट पर आयकर छापा पड़ा। उनके बंगलौर, चेन्नै, दिल्ली और मैसूरू के 67 ठिकानों पर तीन सौ अफसरों ने अस्सी घंटे छानबीन की। मौके पर सीआरपीएफ की तैनाती हुई। करीब दस करोड़ की संपत्ति जब्त हुई। अग्रिम जमानत के बावजूद तीन सितंबर, 2019 को उन्हें गिरफ्तार किया गया और डेढ़ माह से अधिक का समय उन्हें तिहाड़ जेल में बिताना पड़ा। उन पर मनी लांड्रिंग, कर वंचन, अवैध खनन के आरोप लगे, लेकिन वह डिगे नहीं और सोनिया-राहुल के प्रति अडिग वफादारी के सुबूत देते रहे।
दिल्ली में गत दिनों मैराथन बैठकों ने संकेत दिया था कि कर्नाटक की देगची में नेतृत्व परिवर्तन की खिचड़ी पक रही है। सिद्धारमैया ने कहा भी कि वह केंद्रीय नेतृत्व के कहने पर त्यागपत्र दे रहे हैं। कर्नाटक-प्रभारी सुरजेवाला इसे पॉवर-शेयरिंग नहीं मानते, लेकिन यह तय है कि डीकेएस के सब्र का प्याला छलकने की वेला आ सकती थी। कर्नाटक में 224 के सदन में कांग्रेस के 136, बीजेपी 63 और जेडीएस के 18 विधायक हैं। इसके बावजूद कर्नाटक बीजेपी के अध्यक्ष विजयेंद्र के कथन कि कर्नाटक में समय पूर्व चुनाव को कोई रोक नहीं सकता, ने धुकधुकी बढ़ा दी है। सीएम के विधि सलाहकार पोन्नन्ना भी ‘वेट एंड वाच’ की बात कह रहे हैं, क्योंकि राज्यपाल थावरचंद गहलोत राजधानी के बाहर हैं और मुख्यमंत्री से उनके रिश्ते जगजाहिर हैं। कोई नहीं जानता कि सिद्धारमैया की भूमिका क्या होगी, मगर कांग्रेस के लिए कर्नाटक बड़ा मायने रखता है और तीन साल बाद ही सही डीकेएस के लबों और प्याली के बीच फासला मिटता दीख रहा है। नेतृत्व परिवर्तन के प्रसंग का पटाक्षेप इस तरह हुआ कि शिवकुमार ने सिद्ध के पांव छुवे और सिद्ध ने उन्हें गले लगाया।
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बड़ी ख़बर….
*कर्नाटक के राज्यपाल के विशेष सचिव प्रभु शंकर ने कहा, “मुझे सिद्धारमैया का मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा मिल गया है, लेकिन इसे केवल राज्यपाल ही स्वीकार कर सकते हैं, जब वह वापस लौटेंगे।*
*कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत गुरुवार को पहले ही अपने गृह निवास नागदा के लिए रवाना हो चुके थे। उनकी धर्म पत्नी का स्वास्थय खराब बताया जा रहा है।*
