विश्व थायरॉइड दिवसः थकान, अवसाद और सांस फूलना लक्षण हैं थायराइड के-डॉ. नागेंद्र

कोरबा 25 मई। प्रदूषणजन्य समस्याओं से कोरबा जिले की बड़ी आबादी काफी समय से दो-चार हो रही है। इनमें श्वसन संबंधी बीमारियां अहम है। इन्हीं के बीच जिले में थायराइड के पीडितों की संख्या में भी इजाफा हो रहा है। लोगों को अगर लगता है कि काम के दौरान उन्हें थकान, अवसाद, कम या बिल्कुल भी पसीना नहीं आ रहा है और सांस फूल रही है तो इसे हल्के से न लें। ये थायराइड के प्रमुख लक्षण हैं।
आयुर्वेद विशेषज्ञ और आयुष मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा ने बताया कि थायराइड ग्रंथि पर गलत ऑटोइम्यून हमले के कारण थायरोक्सिन हार्मोन का अत्यधिक उत्पादन हाइपरथायरायडिज्म की ओर ले जाता है, जिसे ग्रेव्स रोग के रूप में भी जाना जाता है। लक्षणों में थकान, चिंता और अत्यधिक पसीना आना शामिल हैं। यद्यपि अधिकांश थायरॉइड नोड्यूल कैंसर रहित होते हैं, फिर भी उनमें से कुछ घातक कोशिका वृद्धि का कारण बन सकते हैं, जिससे थायरॉइड कैंसर हो सकता है। घेंघा रोग की उत्पत्ति भी इसी का एक हिस्सा है। मानव शरीर में आयोडीन की तीव्र कमी से थायरॉयड ग्रंथि में सूजन आ जाती है, जिसे घेंघा रोग कहा जाता है।
डॉ. शर्मा ने बताया कि थायराइड के स्थिति में पीडि़त व्यक्ति के व्यवहार में कई प्रकार के परिवर्तन सामान्य हैं। इनमें चिड़चिड़ापन, चिंता या अवसाद का अनुभव होना शामिल है। इन सबके चक्कर में बाल झडने की समस्या भी उत्पन्न हो जाती है। शीत और ताप संवेदनशीलता का स्तर भी बढ़ जाता है। इसके साथ ही मांसपेशियों में दर्द, ऐंठन या कमजोरी का अनुभव भी होता है। इसके अलावा पीडि़तों को कई प्रकार के शारीरिक व मानसिक विकार से भी जूझना पड़ सकता है। इसलिए दिनचर्या और खानपान को बेहतर करने की जरूरत है।
थायरॉइड विकार भले ही प्रारंभ में दिखने वाले न लगें, लेकिन समय पर निदान और सावधानी से इन्हें नियंत्रित किया जा सकता है। विश्व थायरॉइड दिवस हम सभी को इस अदृश्य लेकिन प्रभावशाली रोग के प्रति जागरूक होने और दूसरों को भी जागरूक करने की आवश्यकता है।
