रिसदी से कुआभट्टा तक सड़क के किनारे हो रहा खुलेआम अतिक्रमण

कोरबा 13 मई। क्या शहर में अतिक्रमण करने की खुलेआम छूट दे दी गई है या फिर इस तरह की गतिविधियों से प्रशासन को कोई लेना-देना है ही नहीं। रिसदी से लेकर मेडिकल कॉलेज, ओपन थिएटर से लेकर कुआंभऋा और राताखार बायपास रोड समेत कटघोरा में इस तरह की गतिविधियां उफान पर है। जानकारों का कहना है कि जिस तरीके से मुख्य सडकों के किनारे कब्जा हो रहा है उसमें साजिश हो सकती है लेकिन अधिकारी मौन क्यों हैं। यह पहली है।
कोरबा में दो साल पहले प्रशासन और नगर निगम ने संयुक्त रूप से कार्यवाही करते हुए राताखार बायपास रोड में हसदेव के किनारे अवैध ढाबे से लेकर पंक्चर और कई दुकानों पर कार्यवाही की थी और उन्हें हटा दिया था। यह सब सुनियोजित साजिश के तहत यहां पर किया गया था और इसकी आड़ में नदी और रोड की तरफ खाली जमीन को हथियाने की प्लानिंग थी। वर्तमान में इसी तरह की तस्वीर रिसदी चौराहा से मेडिकल कॉलेज को जाने वाले रास्ते पर दिखाई दे रही है। गमले से लेकर छोटी-मोटी दुकानों की आड़ लेकर जमीन कब्जाने का खेल जारी है। अधिकारियों की नजर में भले ही यह सब मामला आ भी गया हो लेकिन उन्होंने इस तरफ कार्यवाही की मानसिकता नहीं बनाई। बुधवारी बाजार के महाराणा प्रताप तिराहे से कुआंभऋा जाने वाले रास्ते का हालचाल कमोबेश यही है। यहां भी धीरे-धीरे नगर निगम से लेकर नजूल की जमीन जो कि सडक के दोनों तरफ है, अतिक्रमण की भेंट चढ़ती जा रही है। रोकने-टोकने की व्यवस्था न होने से अतिक्रमणकारियों के हौसले बुलंद हैं। जानकारों का कहना है कि शहर के जैसे हालात ग्रामीण क्षेत्रों में भी बने हैं और संगठित तौर पर जमीन हथियाने का खेल जारी है।
सबसे हैरान करने वाला घटनाक्रम आज सामने आया, जब सरकारी टीम ने घंटाघर के पास एक दंपत्ति द्वारा संचालित गन्ना जूस के ठेले को हटा दिया गया। तर्क दिया गया कि सडक के किनारे इसके स्थापित होने से बाधाएं हो रही है। मौके का बिजली कनेक्शन भी हटवा दिया गया। दंपत्ति ने आसपास की दूसरी ऐसी दुकानों की तरफ इशारा किया तो कहा गया कि यह दूसरा विषय है। सवाल उठ रहा है कि अगर एक ही रास्ते पर बहुत सारी दुकानें चल रही है तो सिर्फ एक से आपत्ति कैसे हो सकती है। कई बार इस तरह की कार्यवाही पर सवाल उठ चुके हैं और संदेश गया है कि आखिर कौन से सिद्धांत के आधार पर यह सब काम किया जाता है।
सरकार की योजना से ही नगर पालिक निगम कोरबा द्वारा बीते वर्षों में लोगों की सुविधा के लिए ओपन थिएटर के प्रवेश द्वार से बुधवारी बाजार और दूसरी तरफ जैन मंदिर रेलवे क्रासिंग से 150 मीटर की दूरी तक फुटपाथ तैयार किया गया। इसका पूरा हिस्सा अतिक्रमण की चपेट में रहा। पिछले महीने नगर निगम ने एक तरफ रेलिंग लगाकर अवैध कब्जाधारियों को हटा दिया जबकि ओपन थिएटर क्षेत्र का फुटपाथ अभी भी अतिक्रमणकर्ताओं के शिकंजे में है। सवाल जायज है कि इसे किसका संरक्षण मिला है और इसकी उपयोगिता क्या लोगों के बजाय केवल अवैध रूप से दुकान चलाने वालों के लिए है।
