सायोनी घोष : पश्चिम बंग की सितारा नेत्री@डॉ. सुधीर सक्सेना

सायोनी घोष : पश्चिम बंग की सितारा नेत्री
• डॉ. सुधीर सक्सेना
सायोनी घोष इन दिनों सुर्खियों में हैं। वह ख्याति के हिंडोले में सवार है। उनकी वाग्प्रगल्भता की बदौलत उनकी प्रसिद्धि का चपल अश्व संसद की प्राचीर कभी का लांघ चुका था, लेकिन पश्चिम बंगाल में प्रतिष्ठापूर्ण चुनाव की कश्मकश के दरम्यां वह सूबे की सरहदों को पार कर देश में चतुर्दिक प्रसिद्ध हो गयी हैं। पश्चिम बंगाल के चुनाव में वह सर्वाधिक चहेती और लोकप्रिय सितारा नेत्री बनकर उभरी हैं।
वह युवा है। सुदर्शना हैं। चपल और वाकपटु है। अपनी प्रांजल भाषा और शैली से उनमें लाखों की भीड़ को मंत्रमुग्ध करने की सामर्थ्य है। वह लोगों से वाणी के माध्यम से ‘कनेक्ट करने की कला में लासानी है। सियासत में आये हुये उन्हें ज्यादा अर्सा नहीं हुआ है लेकिन संसद से सड़क तक उनकी सक्रियता ‘शी इज मेड फॉर पॉलीटिक्स’ की तस्दीक करती है। यूं तो खांटी बंगला-भाषी परिवार में जनमी हैं, अलबत्ता उन्हें हिन्दी और बंगला पर समान और यकसां अधिकार है। उनका लहजा बाज वक्त किंचित चुगली जरूर करता है, किंतु उनका शब्द-विन्यास और रवानी लोगों को ‘इंप्रेस करता है। पश्चिम बंगाल में चुनावी बेला में उनके गाये गीत ‘आमार हृदय माझे काबा, नयने मदीना (मेरे दिल में काबा है, आँखों में मदीना) गली-कूचो में गूंज रहा है। चुनावी सभाओं की उनकी आकर्षक प्रस्तुति ने इसे बंगाल में ओरछोर गुंजित कर दिया है। वह चंचला है, लिहाजा मंच पर वह एक ठौर थिर नहीं रहती, बल्कि अपनी भंगिमाओं और गति से पूरा मंच छेंक लेती है। वह ‘ला इलाह’ से शुरू कर कुरान की आयतें सुना सकती हैं और आद्योपांत हनुमान चालिसा का पाठ भी कर सकती हैं। उनकी वाणी में व्यंग्य विनोद है और दंश भी। वह मौके पर तंज करने से नहीं चूकती। वह अमित शाह की बातों को जुमला करार देती हैं और संसद में सहास्य कहती हैं कि यहाँ तो कैमरे भी ‘कंप्रोमाइज्ड’ हैं। आशय यह कि बोल विपक्षी नेता रहा होता है, मगर कैमरा दिखाता है सत्ता पक्ष के नेता को। लगे हाथों वह कहने से नहीं चूकतीं कि हम आह भी नहीं भरते हैं तो हो जाते हैं बदनाम। वो कत्ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होता।
सायोनी को संसद में प्रवेश किये फकत दो साल हुए हैं, लेकिन इस कम अर्से में अपनी तहरीरों से उन्होंने सबका ध्यान खींचा है। शब्दों की तीखी फुलझड़ियां छोड़ने में वह महुवा मोइत्रा की नवोदिता जोड़ीदार हैं। वह संसद में बोलती हैं, तो बरबस दशकों पहले की तारकेश्वरी सिन्हा याद हो आती हैं। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की मुखिया ममता बैनर्जी उनकी आदर्श या ‘आइकॉन’ हैं। सभाओं में दीदी का नारा दोहराती हैं : ‘कोरबो, लोड़बो, जीतबो।’ वह सेक्यूलर मूल्यों की ध्वजवाहक है; हिन्दू-मुस्लिम ऐक्य की हिमायती। सभाओं में वह गुनगुनाती हैं तू हिन्दू बनेगा न मुसलमान बनेगा इंसान की औलाद है, इंसान बनेगा।
सायोनी घोष ग्लैमर की दुनिया से राजनीति में आई हैं। वह बंगला टीवी और फिल्मों की सफल, प्रशंसित और पुरस्कृत कलाकार हैं। लेकिन उनकी सादगी उन्हें सर्वथा अलग पायदान पर खड़ा कर देती है। सफेद या हल्के रंग की चौड़े पाट की साड़ी, माथे पर बड़ी लाल गोल बिंदी और पांवों में हवाई चप्पल। पहरावे में ही नहीं, प्रवृत्ति में भी वह ममता दी की अनुगामिनी हैं : मुखर और संघर्ष चेता। उन्हें देखकर, उनके लुक, उनके हावभाव, उनकी तुर्शी और त्वरा देखकर ममता दीदी के प्रतिरूप का आभास होता है। लगता है कि कहीं यह ‘बांग्लार मेये’ दीदी की छोटी बहन तो नहीं है। उनमें दीदी के नक्शे-पा चलने की ख्वाहिश भी नजर आती है। वह प्रायः कहती हैं : बंगाल की नारी। हवाई चप्पल, सफेद साड़ी। ममता दी हमारी। भाजपा पर भारी। वह बीजेपी को बांग्ला-विरोधी और बांग्ला-भाषा विरोधी बताती हैं और भाजपा को समस्या तथा दीदी को समाधान निरूपित करती हैं। शेरो-शाइरी की शौकीन सायोनी चुटकी लेती हैं : मोहब्बत चांद से होती है, सितारों से नहीं। मोहब्बत दीदी से होती है, मोदी-शाह से नहीं।” बंगाल की मिट्टी को पवित्र बताकर वह कहती हैं : बंगाल मध्यप्रदेश नहीं है। बंगाल गुजरात नहीं है। बंगाल राजस्थान या हरियाणा भी नहीं है। वह फख्र से कहती हैं कि बंगाल में धर्म के आधार पर बंटवारा नहीं होता और भाईचारा यहां की पहचान और ताकत है। किस्सा-कोताह यह कि इस फायर ब्राण्ड नेत्री ने पश्चिम बंगाल में टीएमसी की जीत के लिये सारी ताकत झोंक दी है।
ऐसा नहीं है कि सायोनी की राजनीतिक यात्रा की शुरुआत सफलता से हुई हो। उनका जन्म कोलकाता में 27 जनवरी, सन 1993 को हुआ। परिवार गैर राजनीतिक था। मां सुदीपा और पिता समीर घोष को अनुमान न था कि उनकी बिटिया सितारा नेत्री बनकर उभरेगी। हां उसके अभिनय और गायन प्रतिभा के लक्षण कैशोर्य में ही दिखने लगे थे। सन 2010 से शुरू उनका फिल्मोग्राफी का करियर दिनोंदिन परवान चढ़ता गया। उन्होंने कितनी ही फिल्मों, वेब सीरीज और टीवी सीरियलों में काम किया और अवार्ड बटोरे। नोटोबर नाटआउट से शुरू उनका फिल्मी करियर पुनश्च, अंतराल, अरण्यदेव, बिटनून, शोत्रु, आगुन, अपराजितो, रहस्यमय, सांझ बाती, मायेर बिये, चौखट, कानामाछी, राजकाहिनी, नेटवर्क, द्विखंडितो, किछू ना बोला कोथा, प्रतिद्वंद्वी और आरो एक बार आदि में सफलतापूर्वक आगे बढ़ा। वह वेबसीरीज पाकेटमार (2017) चरित्रहीन (2018) बोइ केनो साइको (2019) में भी नजर आईं। टीवी चैनेलस्टार जलसा में भी उन्होंने चमक बिखेरी और पार्श्व गायन (कोठीन) भी किया। राजकाहिनी (2015) और अंजनदत्त निर्देशित व्योमकेश ओ चिरिया खाना (2016) में उनका अभिनय सराहा गया। सौरभदास, रुद्रनील घोष और इंद्राशीष राय के साथ उनकी जोड़ी सफल रही। श्रीजीत मुखर्जी और विश्वजीत चक्रवती जैसे निदेशकों ने उनकी प्रतिभा को पहचाना। छोटे पर्दे पर वह सन 2022 में सिटी आफ जैकाल्स और बिट्नून में ऋत्विक चक्रवर्ती के साथ दिखाई दीं। डेली सीरियल प्रोलोय आपूछे ने उन्हें घर-घर में पहुंचा दिया। सन 2010 में उन्हें बेस्ट एक्ट्रेस, सन 2013 में पीपुल्स च्वायस और सन 2016 में बेस्ट एंकर अवार्ड मिले।
सायोनी ने सन 2021 में तृणमूल कांग्रेस ज्वाइन की और उसी साल आसनसोल दक्षिण से असेंबली के लिये चुनाव लड़ा। लेकिन वह बीजेपी के अग्निमित्र पाल से हार गयीं। उनकी प्रतिभा को चीन्ह कर ममता दी ने उन्हें जून 21 में पार्टी की यूथ विंग का अध्यक्ष बना दिया। अभिषेक बैनर्जी की जगह लेना बड़ी बात थी। उन्होंने अथक मेहनत की और दीदी के भरोसे को बटटा नहीं लगने दिया। सन 2024 के चुनाव में वह जादवपुर से ढाई लाख से अधिक मतों से लोकसभा के लिये चुनी गयीं। यह वही जादवपुर है, जहां से दशकों पहले युवा ममता बैनर्जी ने माकपा के दिग्गज सोमनाथ चटर्जी को हराकर राजनीति में धमाका किया था।
संसद की यह युवा सुदस्या फिलवक्त सड़क पर है। मकसद है असेंबली चुनाव में टीएमसी की जीत। वह आरोपों से बिंधी रही है और 21 नवंबर, सन 22 को उन्हें उपद्रव, हिंसा और कदाचार के आरोप में त्रिपुरा पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। वर्धमान में कर्जन द्वार संबंधी बयान भी विवाद का विषय रहा। उन पर भर्ती घोटाले में संलिप्तता का आरोप लगा और जून 24 ईडी ने उनसे लगातार दस घंटे पूछताछ की। यही सायोनी अब पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार में लिप्त है। वह बस्ती-बस्ती, द्वारे-द्वारे जा रही है। उन्हें सुनने के लिये सर्वत्र भीड़ जुटती है। टॉलीवुड की सायोनी नैन, बैन, और सैन की महत्ता जानती हैं। उनका यकीन इस कथन में झलकता है कि जोतोई कोरो हमला, आबार जितबे बांग्ला।’ देखना दिलचस्प होगा कि सायोनी की पार्टी मोदी-शाह की पार्टी पर सयानी पड़ती है या नहीं और और जनादेश ‘निजेर मेये केई चाई’ (बंगाल अपनी बेटी को चाहता है) की पुष्टि करता है या नहीं?
………………….
