ग्रीष्म ऋतु में लू एवं तापघात से बचाव हेतु शासन द्वारा विस्तृत दिशा-निर्देश जारी

कोरबा 25 अप्रैल 2026/ छत्तीसगढ़ शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग तथा कलेक्टर कार्यालय कोरबा द्वारा वर्ष 2026 की ग्रीष्म ऋतु को ध्यान में रखते हुए लू (हीट वेव) से बचाव और तैयारी को मजबूत बनाने के उद्देश्य से विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों के अनुरूप तैयार इन उपायों का मुख्य लक्ष्य भीषण गर्मी के दुष्प्रभावों से आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
निर्देशों के अनुसार राज्य, जिला, तहसील और विकासखण्ड स्तर पर नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है, जो सभी संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित करेंगे और आवश्यक चेतावनी एवं सूचना प्रसारित करेंगे। लू से बचाव के उपायों का व्यापक प्रचार-प्रसार रेडियो, टेलीविजन, व्हाट्सएप सहित स्थानीय भाषा के पोस्टर एवं पैम्पलेट के माध्यम से किया जाएगा। गर्मी की तीव्रता को देखते हुए विद्यालयों, शिक्षण संस्थानों एवं मनरेगा श्रमिकों के कार्य समय में आवश्यकतानुसार परिवर्तन करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
तापघात के लक्षणों में तेज सिरदर्द, सिर में भारीपन, तेज बुखार, मुंह का सूखना, शरीर का तापमान बढ़ने पर भी पसीना न आना, चक्कर आना, उल्टी, कमजोरी, शरीर में दर्द, अत्यधिक प्यास लगना और पेशाब कम होना प्रमुख रूप से शामिल हैं।
लू से बचाव के लिए लोगों को पर्याप्त पानी पीने, ओआरएस घोल, लस्सी, छाछ, नींबू पानी और चावल के पानी (बोरे बासी) का सेवन करने की सलाह दी गई है। हल्के रंग के ढीले और सूती कपड़े पहनने तथा बाहर निकलते समय सिर को कपड़े, टोपी या छाते से ढकने की अपील की गई है। यदि किसी व्यक्ति को लू लगने के लक्षण दिखाई दें, तो उसे तुरंत छायादार जगह पर लिटाकर ठंडे पानी का छिड़काव करना, सिर पर ठंडी पट्टी रखना और तत्काल चिकित्सा सलाह लेना आवश्यक बताया गया है। प्रारंभिक परामर्श के लिए 104 आरोग्य सेवा केंद्र से निःशुल्क संपर्क किया जा सकता है।
जनता को दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच अनावश्यक रूप से बाहर न निकलने, नंगे पैर बाहर न जाने और शराब, चाय, कॉफी व कार्बोनेटेड सॉफ्ट ड्रिंक्स के सेवन से बचने की सलाह दी गई है, क्योंकि ये शरीर को निर्जलित करते हैं। उच्च प्रोटीन, मसालेदार, तैलीय और बासी भोजन का सेवन भी हानिकारक माना गया है।
विभिन्न विभागों को भी विशेष जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। स्वास्थ्य विभाग को सभी स्वास्थ्य केंद्रों में ओआरएस का पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित करने, श्रम विभाग को कार्यस्थलों पर छाया और पीने के पानी की व्यवस्था करने तथा गर्भवती महिलाओं और बीमार श्रमिकों का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए गए हैं। नगरीय प्रशासन को सार्वजनिक स्थानों पर वाटर एटीएम और प्याऊ की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। पशु चिकित्सा विभाग को भी पशुओं के लिए छाया और पीने के पानी की पर्याप्त उपलब्धता पर ध्यान देने के लिए कहा गया है।
कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत ने नागरिकों से अपील की है कि वे इन निर्देशों का पालन करें, सतर्क रहें और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें।
