दो केंद्रों में धान खरीदी प्रारंभ, 30 मीट्रिक टन धान खरीदने का लक्ष्य

सहकारिता कर्मियों के हड़ताल पर जाने से व्यवस्था बदली
कोरबा 15 नवम्बर। खरीफ सीजन की धान की खरीदी के लिए सत्र 2025 -26 का कार्य आज से कोरबा जिले में प्रारंभ होना है। 65 उपार्जन केदो में इस कार्य को संपादित करने की व्यवस्था है। चार मांगों को लेकर स्ट्राइक पर सहकारी समितियां के कर्मचारी चले गए हैं इसलिए अस्थाई रूप से मौके पर कुछ व्यवस्थाएं की गई है। जिले के पाली और सोनपुरी उपार्जन केंद्र के लिए कल 40 क्विंटल धान विक्रय का टोकन कटा है। आज दोपहर 2.00 बजे औपचारिक रूप से इन केंद्रों में धान उपार्जन का शुभारंभ किया।
पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष कोरबा जिले में कुल पंजीकृत किसानों की संख्या 56000 के अनुमानित है। बीते वर्ष 54000 किसानों ने धान विक्रय के लिए पंजीकरण कराया था। सरकारी सूत्रों से मिली जानकारी में बताया गया कि जिले के लिए लाख मैट्रिक टन धान खरीदने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। प्रति हेक्टेयर पर 21 क्विंटल की मात्रा को सुनिश्चित करते हुए इस पर 3100 रुपए की दर से समर्थन मूल्य का भुगतान किया जाएगा। बताया गया कि खरीफ सीजन की मुख्य फसल धान की पैदावार जिले के जितने हिस्से में किसानों के द्वारा की गई है, उसके विक्रय का प्रबंध 49 समितियां के अंतर्गत आने वाली 65 इकाइयों में किया गया है। प्रशासन इसे लेकर पहले से सक्रिय था इसलिए संबंधित प्राथमिक व्यवस्थाएं समय से पहले कर ली गई। तमाम तरह की अर्चना को ध्यान में रखते हुए नेशनल इनफॉरमेशन सेंटर के माध्यम से धान की पैदावार करने वाले किसानों के लिए ऑनलाइन टोकन की व्यवस्था की गई। बताया गया कि पाली समिति के लिए 30 क्विंटल का एक और सोनपुरी समिति के लिए 10 क्विंटल का एक टोकन जारी हुआ है। इस तरह इस स्थान पर धान खरीदी के घोषित दिवस 15 नवंबर को कार्य का शुभारंभ भी कर दिया जाएगा। जानकारी मिली है कि बीते वर्षों में टोकन को लेकर किसानों को कई प्रकार के मुश्किलों का सामना करना पड़ा इसलिए अब वह मोबाइल से ही टोकन प्राप्त कर सकेंगे। ऐसे में उनका समय बचेगा और व्यर्थ की मुश्किल सामने नहीं आएंगे।
कृषि अधिकारियों ने हाथ खड़े किएसमय पर उठाव न होने की स्थिति में सुखत की भरपाई सरकार के स्तर से करने, रेगुलराइजेशन सहित चार मांगों को लेकर सहकारी समिति के लिए काफी समय से सेवा दे रहे कर्मचारियों ने हड़ताल कर रखी है। उनकी मांगों पर प्रशासन की ओर से किसी प्रकार की रुचि नहीं दी गई और इस बीच धान खरीदी का दिन सामने आ गया। प्रशासन ने वैकल्पिक रूप से चार विभागों को इस काम में लगाकर धान खरीदी करने की जिम्मेदारी दी लेकिन पटवारियों ने व्यस्तता बताते हुए हाथ खड़े कर दिए। सहायक कृषि विस्तार अधिकारियों ने ऐसे काम का अनुभव न होने की बात करते हुए खुद को धान खरीदी से बिल्कुल अलग रखने की बात कही है। ऐसे में लगता है कि बहुत जल्द हड़ताली कर्मचारी को कम पर वापस लाने के लिए सरकार जतन कर सकती है।
