कोरबा की सड़कें अपनी बदहाली पर आंसू बहाने को मजबूर, कब होगा समाधान

बारिश में कीचड़ से परेशानी और बाकी मौसम में गर्द-गुबार के कारण मुश्किलें
कोरबा 03 नवम्बर। भले ही विकास के मामले में कोरबा लगातार तेजी से कदमताल कर रहा है लेकिन प्रगति के सूचक समझी जाने वाली सडकें अपनी बदहाली पर आंसू बहाने को मजबूर है। एक-दो सडकों को छोड़ दें तो बाकी में गड्ढे ज्यादा हैं और बड़े हिस्सों में गड्ढों ने अतिक्रमण कर रखा है। ऐसे में लोग विकल्प अपनाकर आना-जाना कर रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर जो समस्या सडकों पर बनी हुई है उसका समाधान कब तक कराया जाएगा और लोगों को राहत दी जाएगी।
सडकों के मामले में सर्वसम्मत धारणा यही है कि वे खुद स्थिर रहती है और वाहनों के जरिए लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाती है। केवल लोगों को ही नहीं बल्कि अलग-अलग तरह की सामाग्री को एक जगह से दूसरे जगह परिवहन कराने में सबसे किफायती माध्यम सडकें ही है। इसलिए सरकार सडक निर्माण को लेकर जोर दे रही है। इतना सबकुछ होने के बावजूद कोरबा जिले में सडकों की जो दशा है वह न केवल जिले की 15 लाख की आबादी बल्कि छत्तीसगढ़ और अन्य प्रदेशों के भी लोगों को परेशान कर रही है जो अपने-अपने प्रयोजन से हर दिन यहां की सडकों से होकर गुजरते हैं। जिले में एकमात्र एनएच-130 को अगर किनारे कर दिया जाए तो दूसरे हिस्सों को जोडने वाले सडकें खराब दशा में है। जहां-तहां सडकों के किनारे से लेकर बीच के हिस्से इसलिए गायब है क्योंकि यहां पर गड्ढे हैं। कहीं पर ऐसी स्थिति 10 मीटर की है तो कहीं 100 मीटर तक की। इससे कोई भी समझ सकता है कि गड्ढों का आकार-प्रकार कैसा होगा और इन सबके बीच आवागमन करने में दुस्वारियों का सामना करना पड़ता होगा।
नगर निगम क्षेत्र के साथ-साथ नगर पालिका कटघोरा, नगर पंचायत छुरीकला के अतिरिक्त लोक निर्माण विभाग के हिस्से में भी सडकों का हाल कुछ इसी तरह का है। कहने का मतलब यह है कि सडकों की बदहाली का सिलसिला सिर से लेकर पैर तक का है और दर्द अनंत है। इनके मसले को लेकर लोगों ने कई बार प्रदर्शन किया है, अधिकारियों को ज्ञापन दिया है और दूसरे स्तर पर चेतावनी दी है लेकिन नतीजे सिफर रहे। फिलहाल समस्याग्रस्त ऐसे सभी क्षेत्रों में लोग धूल का गुबार झेलने के साथ गड्ढों के हिचकोले खाने को मजबूर हैं। लोगों को लगता है कि हर वर्ष इस तरह की समस्या को बर्दाश्त करने उनकी किस्मत का हिस्सा है।
