दो माह पहले काम से निकाले गए 80 ठेका कर्मचारी नहीं किए गए बहाल

कामगारों ने 30 जुलाई को मानिकपुर खदान बंद करने दी चेतावनी
कोरबा 22 जुलाई। मानिकपुर कोयला खदान में नियोजित एक निजी ठेका कंपनी ने दो महीना पहले लगभग 80 कर्मियों को काम से निकाल दिया है। इनकी अब तक बहाली नहीं हुई है। इससे अब ठेका कर्मियों ने भू-विस्थापित कामगार संगठन के बैनर तले 30 जुलाई को खदान बंद करने चेतावनी दी है। इनका कहना है कि ओबी फेन्स पर पानी भरने का हवाला देकर बिना किसी पूर्व सूचना के काम पर नहीं आने की जानकारी दी।
एसईसीएल मानिकपुर माइंस में खदानबंदी आंदोलन की प्रशासन को कलेक्ट्रेट में ज्ञापन देकर जानकारी दी है। ज्ञापन में बताया है कि मानिकपुर खदान में ओवरबर्डन हटाने का ठेका कलिंगा कमर्शियल कॉर्पोरेशन लिमिटेड कंपनी को मिला है। निजी कंपनी बदलने के बाद दो साल से यह कंपनी मिट्टी खनन और इंपिंग यार्ड तक परिवहन का काम कर रही है। बीते 18 मई से लगभग 80 ठेका कामगारों को बिना पूर्व सूचना के काम से निकाल दिया है। इन कामगारों में भारी वाहनों के चालक और हैवी मशीनों के ऑपरेटर शामिल हैं। निविदा की अवधि भी इसी साल के दिसंबर महीने तक है। 1095 दिन का वर्क ऑर्डर जारी किया गया है।
इससे पहले कामगारों को बिना सूचना दिए काम बंद करा दिया है। ठेका समाप्त होने में 7 माह को अवधि बची हुई है। ठेका कामगारों ने कहा कि उस समय मौखिक रूप से निजी कंपनी के ओबी फेस पर बारिश का पानी भरने का हवाला दिया। बेमौसम बारिश हुई थी, इससे जल्द बहाली की उम्मीद थी, मगर अब तक बहाली नहीं करने दूसरे राज्यों से लाकर काम पर रखने की मंशा स्पष्ट होने से 30 जुलाई को मानिकपुर माइंस में खदानबंदी आंदोलन का निर्णय लिया है। ज्ञापन में वासुदेव, रम्मेलाल धीवर, मोतीलाल यादव, संतोष कुमार सिदार, जितेन्द्र राव, रामकुमार साहू आदि के हस्ताक्षर हैं।
’ ठेका कर्मियों की जॉब सुरक्षा की गारंटी का उठा चुके हैं मुद्दा
कोयला खदानों में कई कार्य एसईसीएल ने ठेके पर दे रखा है। इसमें ओबी हटाने से लेकर कोयला खनन और परिवहन कार्य भी शामिल हैं। कोयला खदानों में नियोजित कंपनियों के ठेका कर्मियों को काम से निकाले जाने की चिंता रहती है। इनकी जॉब सुरक्षा की गांरटी का मुद्दा कई बार यूनियन नेताओं ने उठाया है। इस दौरान यह भी कहा है कि ठेका लेने वाली कंपनियों बदलने पर भी कर्मचारियों को काम से नहीं निकाला जाए, मगर अब तक ऐसा नहीं हो पाया है।
खदान से सालाना उत्पादन क्षमता बढ़ाने की योजना
मानिकपुर खदान से सालाना उत्पादन क्षमता बढ़ाने की भी एसईसीएल प्रबंधन ने योजना बनाई है। मगर भू-विस्थापितों का कोयला खदान का विरोध बाधा बनी है। पिछले महीने इस पर प्रबंधन ने भू-विस्थापितों से चर्चा भी की थी। अभी मानिकपुर खदान की उत्पादन क्षमता सालाना 52 लाख टन है। इसे बढ़ाकर 60 लाख टन करने की भी योजना बताया गया कि इसकी संबंधित फाइल को एसईसीएल के बोर्ड है। ऑफ डायरेक्टर ने मंजूरी दे दी है और यह फाइल कोल इंडिया मुख्यालय ने कोयला मंत्रालय भेजी है, जहां से अनुमति मिलने पर प्रबंधन उत्पादन क्षमता बढ़ा पाएगी।
