कभी ‘वन चाइल्ड पॉलिसी’ थोपने वाला चीन अब नवजात पर सालाना 3,600 युआन सीधे माता-पिता को देने की योजना बना रहा

बीजिंग। दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन अब बच्चों की कमी से जूझ रही है। कभी ‘वन चाइल्ड पॉलिसी’ थोपने वाला चीन अब नवजात पर सालाना 3,600 युआन (करीब 42,000 रुपए) सीधे माता-पिता को देने की योजना बना रहा है। यह रकम तीन साल तक दी जाएगी व 1 जनवरी 2025 या उसके बाद जन्मे बच्चों पर लागू होगी। योजना की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन यह पूरे देश में लागू होगी। हालांकि, बच्चों की परवरिश, काम और शिक्षा-स्वास्थ्य से जुड़ी सुविधाएं अभी सवालों के घेरे में हैं।

लगातार घट रही जन्म दर

2016 में चीन में जहां 1.88 करोड़ बच्चों का जन्म हुआ था, 2024 में यह संख्या घटकर 99.4 लाख रह गई। चीन की जनसंख्या लगातार तीन साल से घट रही है। संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि 2050 तक यह 1.3 अरब से कम और 2100 तक 80 करोड़ से नीचे जा सकती है। शादी की दर भी रेकॉर्ड निचले स्तर पर है।

तेजी से सिकुड़ रही युवा वर्कफोस

कई इलाकों में स्थानीय सरकारें पहले ही दूसरे और तीसरे बच्चे पर सब्सिडी की घोषणा कर चुकी हैं। कहीं हाउसिंग सब्सिडी, कहीं मुफ्त डे-केयर की सुविधा दी जा रही है। गिरती जनसंख्या से चीन की युवा वर्कफोर्स सिकुड़ रही है, जिसका सीधा असर मैन्युफैक्चरिंग, टेक और सेवा क्षेत्रों की उत्पादकता और आर्थिक विकास पर पड़ रहा है। चीन पहले ही भारत से ‘सबसे अधिक आबादी वाला देश’ होने का तमगा गंवा चुका है, अब डर है कि कहीं आर्थिक बढ़त भी न छिन जाए।

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