देश की एकता को प्राथमिकता देनी चाहिए: शरद पवार

इंडिया गठबंधन की अहम बैठक से बनाई दूरी, राहुल गांधी को झटका

मुंबई / नईदिल्ली (ए)। इंडिया गठबंधन की एकता पर फिर से सवाल उठने लगे हैं. शरद पवार की अगुवाई वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने गौरव गोगोई और डेरेक ओ’ब्रायन की पहल पर बुलाई गई गठबंधन की एक अहम बैठक से दूरी बना ली है. यह बैठक पहलगाम आतंकी हमले, ऑपरेशन सिंदूर और भारत की विदेश नीति को लेकर चर्चा के लिए बुलाई गई है. इसमें करीब 200 सांसद संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग को लेकर पत्र लिखने वाले हैं. लेकिन पवार के इस कदम ने राहुल गांधी और कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा दी हैं.

शरद पवार ने कहा है कि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर संसद में खुली बहस से ज्यादा ‘गोपनीय सर्वदलीय बैठक बेहतर होगी. हमें देश की एकता को प्राथमिकता देनी चाहिए. उनका यह बयान कांग्रेस के आक्रामक रुख के खिलाफ एक सधी हुई चाल मानी जा रही है. सूत्रों के मुताबिक पवार नहीं चाहते कि राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा राजनीतिक रंग ले, क्योंकि इससे विपक्ष की छवि कमजोर हो सकती है.

22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोग मारे गए. इसके जवाब में भारत के ऑपरेशन सिंधुर ने भारत-पाकिस्तान तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है. सात मई को पाकिस्तान में नौ आतंकी ठिकानों को नष्ट करने के बाद ड्रोन और मिसाइल हमलों ने दोनों देशों के बीच तनातनी बढ़ा दी. कांग्रेस इस मुद्दे पर सरकार से जवाब मांग रही है, खासकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के युद्धविराम दावों पर. गौरव गोगोई ने कहा कि यह समय जवाबदेही का है. सरकार को संसद में अपनी रणनीति स्पष्ट करनी होगी. बैठक में दीपेंद्र हुड्डा, डेरेक ओ’ब्रायन, मनोज झा, संजय राउत और रामगोपाल यादव, जैसे नेता हिस्सा ले रहे हैं. टीएमसी ने विशेष सत्र की मांग का समर्थन किया है, लेकिन समाजवादी पार्टी और कुछ छोटे दल असमंजस में हैं. पवार की अनुपस्थिति ने गठबंधन की एकजुटता पर सवाल उठाए हैं. 2020 में गलवान झड़प के दौरान भी पवार ने राहुल गांधी के रुख को ‘अनावश्यक’ बताया था. अब उनका यह कदम गठबंधन में तनाव को और गहरा सकता है. महाराष्ट्र में एमवीए गठबंधन पहले ही कमजोर हो रहा है, जहां शिवसेना और हृष्टक स्टक के बीच सीट बंटवारे पर तकरार चल रही है. विश्लेषकों का मानना है कि पवार अगले साल देश के कई राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर अपनी क्षेत्रीय ताकत को मजबूत करना चाहते हैं. वह कांग्रेस के नेतृत्व वाले राष्टीय एजेंडे में पूरी तरह बंधना नहीं चाहते. अगर स्कऔर अन्य छोटे दल भी पवार की राह पर चलते हैं।

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