विजयादशमी उत्सव में संघ की स्थापना से लेकर मान्यताओं पर हुई चर्चा

कोरबा, 21 अक्टूबर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से विजयदशमी के अवसर पर कोरबा जिले में विभिन्न स्थानों पर उत्सव का आयोजन किया गया। इकाई स्तर पर आयोजित कार्यक्रमों में स्वयंसेवकों ने सहभागिता की। इसी कड़ी में शारदा विहार स्थित दुर्गा पूजा मैदान में मंगलवार सुबह विजयदशमी उत्सव आयोजित किया गया। कार्यक्रम में कोरबा विभाग संघचालक सत्येंद्र दुबे ने मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार रखे।

कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्र निर्माण के कार्यों में सक्रिय एसएन अग्रवाल के मुख्य आतिथ्य में कोरबा विभाग संघचालक सत्येंद्र दुबे एवं उपनगर संघचालक अमृतलाल बत्रा द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। इसके बाद स्वयंसेवक सूर्यबली पाल ने एकल गीत प्रस्तुत कर कार्यक्रम को स्वरमय बनाया। चंद्र कुमार शर्मा ने सुभाषित प्रस्तुत किया। मुख्य वक्ता सत्येंद्र दुबे ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना से जुड़े प्रसंगों के साथ विजयदशमी पर्व के ऐतिहासिक एवं प्रेरणादायी महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कई मान्यताएं सनातन काल से चली आ रही है और व्यापक हिंदू समाज इसका लगातार अनुसरण करते आ रहा है। वेद पुराणों को काफी समय के बाद लिपिबद्ध किया गया लेकिन इससे हजारों साल पहले इसकी विषय वस्तु जीवंत थी। श्रुत परंपरा इसका सबसे बड़ा मध्य थी। ऋषियों ने अपने शिष्यों को संबंधित विषय के बारे में जानकारी दी उन्होंने उसे कंठस्थ किया और फिर एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक इस बात को पहुंचा।समय के साथ कागज से लेकर संचार माध्यम के आविष्कार के साथ इन परंपराओं की जानकारी नए रूप से लोगों को मिली।

उन्होंने महाभारत के प्रसंग का उल्लेख करते हुए पांडवों के वनवास और अज्ञातवास के दौरान आई कठिनाइयों की चर्चा की। उन्होंने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में लंबे समय तक संघर्ष करने के बावजूद पांडव अपने लक्ष्य को लेकर स्पष्ट थे। उन्हें इस बात का विश्वास था कि उन्हें क्या करना है और किस दिशा में आगे बढना है। अंततः सत्य और न्याय का साथ उन्हें मिला। उन्होंने इन प्रसंगों के माध्यम से धैर्य, दृढ़ संकल्प और लक्ष्य के प्रति समर्पण के महत्व को रेखांकित किया। विजयदशमी के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में स्वयंसेवकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम को सफल बनाने में शारदा विहार इकाई के सभी स्वयंसेवकों ने सक्रिय भूमिका निभाई।

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