कोल वाशरियों और पावर प्लांटों की सीबीआई जांच की मांगः भारतीय जनाधिकार पार्टी ने 18 को किया जन-आन्दोलन का ऐलान

कोरबा 16 अगस्त। भारतीय जनाधिकार पार्टी छत्तीसगढ़ ने एसीबी समूह की कोयला वाशरियों, रिजेक्ट कोयला आधारित पावर प्लांटों और ईंधन तंत्र में वर्ष 1999 से अब तक हुए संचालन की सीबीआई जांच की मांग की है। पार्टी ने मामले की जांच के लिए उच्चस्तरीय एसआईटी गठित करने और बहु-एजेंसी फॉरेंसिक ऑडिट कराने की मांग भी उठाई है। इसके साथ ही पार्टी ने 18 अगस्त 2026 को सुबह 11 बजे दीपका-गेवरा स्थित एसीबी इंडिया लिमिटेड कार्यालय के सामने चरणबद्ध शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन और जनआंदोलन का ऐलान किया है।

पार्टी नेताओं का कहना है कि मामला केवल किसी एक वाशरी या प्रदूषण से जुड़ा नहीं है। दीपका, गेवरा, कुसमुंडा, चाकाबुड़ा, रतीजा, रेंकी और बिंझरी सहित संबद्ध वाशरियों, रेलवे साइडिंग, कोयला परिवहन और पावर यूनिटों में कोयला खरीद से लेकर वाशिंग, रिजेक्ट कोयले के निपटान, फ्लाई एश, जल दोहन, औद्योगिक डीजल-बायोडीजल, ळैज् लाभ और डिजिटल रिकॉर्ड तक पूरी प्रक्रिया की जांच जरूरी है।

पार्टी ने कोल कंट्रोलर ऑर्गेनाइजेशन के रिकॉर्ड के आधार पर प्रत्येक वाशरी की स्वीकृत क्षमता, पर्यावरणीय स्वीकृति, सीटीआई-सीटीओ और वास्तविक कोयला प्राप्ति व डिस्पैच का वर्षवार फॉरेंसिक मिलान कराने की मांग की है। साथ ही एक करोड़ मीट्रिक टन से अधिक कोयला मूवमेंट से जुड़े टेंडर, वेब्रिज, रेलवे रेक और डिस्पैच रिकॉर्ड का एंड-टू-एंड सत्यापन कर एक-एक टन कोयले का हिसाब सार्वजनिक करने की मांग की गई है।

पार्टी ने रिजेक्ट कोयले के वर्गीकरण की भी जांच की मांग की है। इसमें यह पता लगाने की बात कही गई है कि कहीं व्यावसायिक रूप से उपयोगी कोयले को रिजेक्ट दिखाकर रिजेक्ट आधारित पावर प्लांटों में तो नहीं खपाया गया। इसके लिए बॉयलर फीडिंग और बिजली उत्पादन के आंकड़ों का मिलान करने की मांग की गई है। वेब्रिज सर्वर, जीपीएस, एफएएसटी. सीसीटीवी, आरएफआईडी और रेलवे रेक से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड का फॉरेंसिक ऑडिट कर कथित फर्जी ट्रिप और वजन में हेरफेर की जांच की मांग भी उठाई गई है।

दीपका-गेवरा क्षेत्र में नदियों, नालों, तालाबों और भूजल के औद्योगिक दोहन का जल-वैज्ञानिक ऑडिट कराने की मांग की गई है। इसके अलावा 10 किलोमीटर के दायरे में वायु प्रदूषण और जनस्वास्थ्य का महामारी-विज्ञान मूल्यांकन तथा फ्लाई एश और वाशरी स्लरी की ड्रोन और जीआईएस मैपिंग से भौतिक जांच की मांग की गई है। पार्टी ने पीईएसए कानून के तहत ग्रामसभा की सहमति और वन-राजस्व भूमि के उपयोग की भी जांच कराने को कहा है।

पार्टी के अनुसार, वर्ष 2015 से औद्योगिक डीजल और बायोडीजल की आपूर्ति, ई-वे बिल, जीएसटी और कर छूट का वित्तीय ऑडिट होना चाहिए। श्रमिकों के पीएफ, ईएसआई,न्यूनतम वेतन और सुरक्षा व्यवस्था की भी जांच की मांग की गई है। साथ ही एसईसीएल छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल, खनिज और श्रम विभाग की जवाबदेही तय करने की मांग की गई है।

भारतीय जनाधिकार पार्टी ने जांच शुरू होने से पहले वेब्रिज, सीसीटीवी, ओसीईईएमएस और ईआरपी से जुड़े डेटा को सुरक्षित और सील करने की मांग की है, ताकि किसी भी डिजिटल या भौतिक रिकॉर्ड से छेड़छाड़ की आशंका न रहे। पार्टी ने पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।

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