ट्रंप प्रशासन को कोर्ट से झटका, फिर भी वीजा पर रोक की तैयारी

एच-1बीः 3 साल तक रोक का विधेयक संसद में पेश

वाशिंगटन. ट्रंप सरकार को एच-1बी वीजा पर एक लाख अमरीकी डॉलर का शुल्क लगाने के प्रयासों पर बड़ा झटका लगा है। अपीलीय अदालत ने सरकार की ओर से दायर याचिका में निचली अदालत के निर्णय पर रोक लगाने की मांग को खारिज कर दिया है। बोस्टन स्थित प्रथम सर्किट अपीलीय अदालत की तीन जजों की पीठ ने ट्रंप प्रशासन की मांग खारिज कर दी। निचली अदालत ने बिना अमरीकी कांग्रेस की मंजूरी के यह शुल्क लगाए जाने को गैरकानूनी बताते हुए रोक लगा दी थी। जजों ने 20 डेमोक्रेट शासित राज्यों की दलील से सहमति जताई, जिसके अनुसार सवाल उठाया गया कि कांग्रेस ने शुल्क बढ़ाने संबंधी ऐसा कोई अधिकार दिया भी है।

राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने सितंबर 2025 में एक आदेश जारी कर एच-1बी वीजा पर फीस बढ़ाकर एक लाख डॉलर कर दी थी। यह फीस पहले दो से पांच हजार डॉलर थी। ट्रंप सरकार ने फीस बढ़ाने के लिए वीजा के गलत इस्तेमाल को वजह बताया था। अमरीकी टेक कंपनियां विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए इसी वीजा पर निर्भर करती है। इस वीजा के सालाना कोटे में सबसे ज्यादा भारतीयों की ही नियुक्ति टेक कंपनियां करती हैँ.

#- 65 हजारः एच-1बी वीजा प्रतिवर्ष जारी करता है अमरीका।

#- 20 हजारः अतिरिक्त वीजा उच्च शैक्षणिक योग्यता वाले विदेशी कर्मचारियों भी जारी किए जाते हैं।

#- 2 से 5 हजार डॉलरः इस वीजा पर शुल्क लिया जाता है।

#- 73 प्रतिशतः सबसे ज्यादा एच-1बी वीजा भारतीय मूल के लोगों को मिले 2023 में।

एक लाख डॉलर शुल्क का भी प्रस्ताव

अमरीकी सीनेट में सत्ताधारी रिपब्लिकल पार्टी के सांसद ने विधेयक पेश कर तीन साल तक एच-1बी वीजा जारी करनेपर रोक लगाने की मांग की है। इसमें वीजा पर एक लाख डॉलर शुल्क को कानून में शामिल करने रिपब्लिकन सांसद टिम शीही ने का भी प्रस्ताव है। मोंटाना से यह विधेयक पेश किया। उन्होंने कहा, अमरीका को ऐसे वीजा जारी नहीं करने चाहिए।

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