टैरिफ वार के बाद अगले साल की शुरुआत में भारत आ सकते हैं ट्रंप

वाशिंगटन। अमरीकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप अगले साल की शुरुआत में भारत का दौरा कर सकते हैं। ट्रंप इससे पहले फरवरी 2020 में भारत आए थे।
अमरीका के विदेश मंत्री माकों रुबियो ने शनिवार को कहा कि ट्रंप प्रशासन इस यात्रा की तैयारी कर रहा है और उसे लेकर काफी सकारात्मक है। उन्होंने भारत को अमरीका का सबसे करीबी साझेदार और सहयोगी देशों में से एक बताते हुए कहा कि दोनों के संबंध मजबूत हो रहे है। रूबियो ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच मजबूत तालमेल कूटनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। दोनों नेता नियमित संपर्क में है और कई अहम मुद्दों पर बातचीत जारी है। दोनों देश व्यापार, रक्षा, उभरती प्रौद्योगिकियों तथा हिंद- प्रशांत क्षेत्र में सहयोग को लगातार आगे बढ़ा रहे है।
सड़क के नाम पर ट्रंप बोले- थैंक यू
तैलंगाना की राजधानी हैदराबाद में उनके नाम पर एक सड़क का नामकरण किए जाने के बाद ट्रंप ने इसकी सराहना की। ट्रंप ने एक पोस्ट में कहा, ‘भारत में नया डॉनल्ड ट्रंप एवेन्यू। किसी भी अमरीकी राष्ट्रपति को इस तरह सम्मानित करने वाला भारत पहला देश है। बैंक यू!’
आपको बता दें की अमेरिका द्वारा टैरिफ (आयात शुल्क) बढ़ाने और व्यापार प्रतिबंधों की नीतियों के कारण भारत-अमेरिका संबंधों में उतार-चढ़ाव आए हैं, जिससे दोनों पक्षों को व्यापार समझौते (Trade Deal) पर फिर से विचार करना पड़ा है। टैरिफ से प्रभावित संबंधों और वर्तमान स्थिति इस प्रकार है।
टैरिफ विवाद और व्यापार घाटा
अमेरिका ने अपने घरेलू उद्योगों की रक्षा के लिए भारतीय सामानों पर शुल्क (टैरिफ) को बढ़ाकर 50% तक कर दिया था। इसके अलावा, अमेरिकी प्रशासन द्वारा भारत समेत अन्य देशों पर ‘जबरी मजदूरी’ का हवाला देकर अतिरिक्त टैरिफ का प्रस्ताव भी रखा गया था।
ऐतिहासिक व्यापार समझौता वार्ता
तनाव के बीच, दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को पटरी पर लाने के लिए वार्ता हुई, जिसमें टैरिफ को 50% से घटाकर 18% करने की रूपरेखा पर विचार किया गया। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट द्वारा अमेरिकी राष्ट्रपति के कुछ कर संबंधी आदेशों को अमान्य करने के बाद यह समझौता अंतिम चरण में अटका हुआ है।
प्रतिद्वंद्वियों पर लाभ की शर्त
व्यापार समझौते को लागू करने के लिए भारत सरकार लगातार अमेरिका से यह आश्वासन मांग रही है कि भारतीय निर्यातकों को वियतनाम, थाईलैंड और मलेशिया जैसे एशियाई प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में कम टैरिफ का स्पष्ट रणनीतिक लाभ मिले।
रणनीतिक और रक्षा साझेदारी बरकरार
टैरिफ को लेकर आर्थिक तनाव के बावजूद, रक्षा, अंतरिक्ष, तकनीकी (AI) और ऊर्जा के क्षेत्र में भारत और अमेरिका की साझेदारी लगातार मजबूत बनी हुई है। क्वाड (Quad) और अन्य रणनीतिक मंचों पर दोनों देश एक-दूसरे के प्रमुख सहयोगी बने हुए हैं।
