नेपाल की नई सरकार एक महीने के अंदर ही विवादों में, दो मंत्री हटे

काठमांडू, जेन-जेड आंदोलन के बाद बनी नेपाल की नई सरकार प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के शपथ लेने के एक महीने के अंदर ही विवादों में घिर गई है। सरकार बनने के कुछ ही समय बाद दो कैबिनेट मंत्रियों को पद छोड़ना पड़ा है। इसके बाद सरकार की सलाह पर राष्ट्रपति ने संसद के दोनों सदनों के सत्र को निलंबित कर दिया। इसका कोई कारण भी नहीं बताया गया। अब सरकार की कार्यशैली और नेतृत्व पर सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि संसद सत्र नहीं होगा तो मंत्रियों को जवाब नहीं देना पड़ेगा, विपक्ष सवाल नहीं पूछ सकता। ऐसी स्थिति में सरकार अध्यादेश के जरिए कानून ला सकती है, जो तुरंत लागू हो जाते हैं। इससे सरकार को फैसले लेने में तेजी मिलती है, लेकिन लोकतांत्रिक संतुलन बिगड़ सकता है।
गृहमंत्री के इस्तीफे ने चौंकाया
संसद सत्र के निलंबन से पहले नेपाल के गृह मंत्री सुदन गुरूंग के इस्तीफे ने चौंकाया था। गुरुंग पर आय से अधिक संपत्ति रखने के आरोप लगे। उनका नाम मनी लॉन्ड्रिंग केस में लिप्त दीपक भट्ट के साथ भी जोड़ा गया। गुरूंग युवाओं के आंदोलन के दौरान चर्चा में आए थे।
श्रम मंत्री को भी हटाया गया था
गुरूंग बालेंद्र की सरकार से जाने वाले दूसरे मंत्री हैं। इससे पहले 9 अप्रैल को बालेंद्र ने श्रम मंत्री दीपक, कुमार साह को बर्खास्त कर दिया था। आरोप था कि उन्होंने पद का गलत इस्तेमाल कर अपनी पत्नी को हेल्थ इंश्योरेंस बोर्ड में नियुक्त करवाया। पार्टी जांच समिति ने इसे आचार संहिता का उल्लंघन माना था।
क्या फेल हुई जेन-जेड राजनीति …
सरकार के रवैये से सवाल उठे हैं कि क्या युवा देश चलाने में असफल हैं। पीएम बालेंद्र 35 साल है। 15 सदस्यीय कैबिनेट के अधिकांश सदस्य पहली बार मंत्री बने हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि नई सरकार के पास न तो वादों को पूरा करने के लिए कोई योजना है और न ही अनुभव।
नीतियों को लेकर घिरी है नई सरकार …
भारत से आने वाले 100 नेपाली * रुपये से ज्यादा कीमत के सामान पर अनिवार्य कस्टम ड्यूटी लगाने के फैसले के खिलाफ सीमावर्ती इलाकों में विरोध प्रदर्शन हुए। नेपाल पहले से ही महंगाई का सामना कर रहा है।
