मध्य प्रदेश में महिला आरक्षण लागू होने के बाद प्रदेश में बढ़ेंगी लोकसभा-विधानसभा की सीटें, बहुमत के लिए चाहिए होंगे इतने विधायक

भोपाल। नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होने के बाद मध्य प्रदेश में लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ने की संभावना है।
भारत सरकार इस संबंध में संशोधन विधेयक 16 अप्रैल को संसद में प्रस्तुत करेगी। इसके साथ ही परिसीमन विधेयक भी लाया जाएगा, जिसमें प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार प्रदेश में सीटों की संख्या में वृद्धि हो सकती है।
जनगणना के आधार पर परिसीमन की तैयारी
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मंत्रियों को इसके संकेत देते हुए वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन की तैयारी करने को कहा है। विधानसभा के पूर्व प्रमुख सचिव एपी सिंह के अनुसार प्रस्तावित बदलावों के तहत मध्य प्रदेश विधानसभा की सीटें 230 से बढ़कर 345 और लोकसभा की सीटें 29 से बढ़कर 43 हो सकती हैं।
लोकसभा-विधानसभा में आरक्षण का प्रभाव
प्रस्ताव के अनुसार लोकसभा में 14 अतिरिक्त सीटें बढ़ सकती हैं, जिनमें 33 प्रतिशत यानी 14 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। वर्तमान में प्रदेश से छह महिला सांसद हैं।
विधानसभा में भी सदस्य संख्या बढ़कर लगभग 345 होने की संभावना है, जिसमें 33 प्रतिशत यानी 114 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। फिलहाल 27 महिला विधायक हैं।
बदलेगा सत्ता का गणित
विधानसभा में सीटें बढ़ने के साथ बहुमत का आंकड़ा भी बदल जाएगा। अभी 230 सीटों में बहुमत के लिए 116 सीटों की जरूरत होती है, जबकि 345 सीटों की स्थिति में यह आंकड़ा बढ़कर 174 हो जाएगा।
एससी-एसटी वर्ग के लिए आरक्षित सीटों की संख्या भी नए परिसीमन के अनुसार बढ़ेगी और महिला आरक्षण इन्हीं सीटों के अनुपात में तय किया जाएगा।
संसद में विधेयक के बाद कार्यक्रम
विधेयक पारित होने के बाद सरकार और भाजपा पूरे प्रदेश में महिलाओं को लेकर बड़े कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी में हैं। इसके लिए बैठकें भी हो चुकी हैं और सभी जिला मुख्यालयों पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मंत्री अपने-अपने प्रभार वाले जिलों में मौजूद रहेंगे।
