जम्मू-कश्मीर शिक्षा के लिए सीएटी के फैसले से रहबर-ए-तालीम शिक्षकों की ट्रांसफर का रास्ता साफ

जम्मू/राजौरी,(अनिल भारद्वाज)_
जम्मू-कश्मीर के स्कूल शिक्षा विभाग में शिक्षक स्टाफ की ट्रांसफर की तैयारी की जा रही है, क्योंकि वार्षिक ट्रांसफर ड्राइव कुछ महत्वपूर्ण बदलाव लाने वाली है। हजारों शिक्षक, शिक्षकों की कमी वाले स्कूल और छात्र अलग अलग विषयों के शिक्षकों की प्रतीक्षा कर रहे हैं, उम्मीद करते हुए कि विषय-विशिष्ट पदस्थापन शिक्षा प्रणाली को लाभ पहुंचाएंगे।

इस वर्ष की ट्रांसफर ड्राइव विशेष रूप से उल्लेखनीय होगी, क्योंकि बड़ी संख्या में रेहबर-ए-तालीम (आरआरईटी) कैडर शिक्षकों को सर्विसेज सलेक्शन बोर्ड (एसएसआरबी) द्वारा भर्ती किए गए शिक्षकों के साथ ट्रांसफर किया जा सकता है। जम्मू के सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (केट) बेंच ने 25 नवंबर 2024 को एक ऐतिहासिक फैसला दिया है, जिसमें कहा गया है कि रेहबर-ए-तालीम शिक्षक, नियमितीकरण के बाद, सामान्य शिक्षक माने जाते हैं और ट्रांसफर के दायरे मे आते हैं।

केट के फैसले ने रेहबर-ए-तालीम शिक्षकों को ट्रांसफर ड्राइव में शामिल करने के लिए रास्ता साफ कर दिया है, और अदालत के फैसले की अवमानना करने से विभागीय प्रमुखों के खिलाफ आगे की कार्रवाई हो सकती है। स्रोतों से पता चलता है कि विभाग ट्रांसफर सूची तैयार कर रहा है, और निदेशक स्कूल शिक्षा जम्मू के हाल के आदेश में रेहबर-ए-तालीम का विशिष्ट या अलग से उल्लेख नहीं है। इससे लगता है कि बड़े पैमाने पर स्टाफ की ट्रांसफर मे रेहबर-ए-तालीम शिक्षकों को भी शामिल किया जाएगा ।
जम्मू कश्मीर रेहबर-ए-तालीम शिक्षक फोरम के वरिष्ठनेताओं अफ्ताब तांत्रे और अजीत सिंह खालसा ने अधिकारियों से केट के फैसले को पूर्ण रूप से और निर्देशों के अनुसार लागू करने के लिए कहा है और कहा कि ऐसा न करने से कैडर के भीतर संघर्ष की भावना हो सकती है। उन्होंने कही कहा की महिला शिक्षकों को ट्रांसफर ना होने से बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे मे न तो वो अपने परिवार के साथ इंसाफ कर पा रही हैं और न ही वो अपने विद्यार्थियों के के साथ।ट्रांसफर ड्राइव मे शिक्षकों की कमी वाले स्कूलों और छात्रों को आवश्यक राहत पहुंचाने की उम्मीद है, और सभी आंखें विभाग की निर्णय-प्रक्रिया पर हैं। ट्रांसफर सूची की प्रतीक्षा के साथ, शिक्षक और छात्र दोनों ही निष्पक्ष और पारदर्शी प्रक्रिया की उम्मीद कर रहे हैं जो अंततः जम्मू-कश्मीर की शिक्षा प्रणाली को लाभ पहुंचाएगी।
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