एससीओ में भारत के विदेश मंत्री और चीन के राष्ट्रपति की मुलाकात, भारत-चीन संबंधों में होगा सुधार

नईदिल्ली/ बीजिंग। एससीओ विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेने बीजिंग पहुंचे विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की। पांच साल के अंतराल में पहली बार चीन पहुंचे विदेश मंत्री की यह यात्रा भारत-चीन संबंधों में सुधार और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
जयशंकर ने चीनी नेतृत्व के साथ बातचीत में चीन द्वारा लगाए गए व्यापार प्रतिबंधों, विशेष रूप से रेयर अर्थ मटेरियल्स के निर्यात और बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए टनल बोरिंग मशीनों की आपूर्ति में रुकावटों पर चिंता जताई। ये प्रतिबंध भारत के इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र को प्रभावित कर रहे है। जयशंकर ने कहा, प्रतिबंधात्मक व्यापार उपायों और रुकावटों से बचना आवश्यक है। उन्होंने, भारत-चीन सीमा पर तनाव कम करने और ब्रह्मपुत्र नदी के जल-वैज्ञानिक डाटा साझाकरण की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही उन्होंने सामान्य संबंधों की बहाली, आम जनों की आवाजाही और सांस्कृतिक आदान प्रदान पर जोर दिया।
आतंकवाद पर एससीओ चुप क्यों ?
जयशंकर ने एससीओ के मंच से कहा कि अलगाववाद, आतंक और उग्रवाद जैसी तीन बुराइयों से निपटने के लिए एससीओB बना था। उन्होंने कहा, भारत में पहलगाम आतंकवादी हमला जानबूझकर जमू-कश्मीर की पर्यटन अर्थव्यवस्था कमजोर करने और सांप्रदायिक तनाव को बढ़ाने के लिए था। एससीओ की चुप्पी को इंगित करते हुए जयशंकर ने कहा, इस हमले की यूएन निंदा कर चुका है।
सामने आए जिनपिंग, अटकलों पर विराम
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के लंबे समय तक गायब रहने के बाद उनके सार्वजनिक रूप से सामने आने से गायब होने की अटकलों पर विराम लग गया। शी जिनपिंग ने सोमवार 15 जुलाई को शंघाई सहयोग संगठन के विदेश मंत्रियों के साथ बैठक की। इस बैठक में भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर भी मौजूद रहे। इस दौरान विदेश मंत्री की चीनी नेता के साथ मुलाकात भी हुई।
