विधायक निर्मला सप्रे की अयोग्यता याचिका पर 2 महीने में फैसला करें स्पीकर’, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला:

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष को निर्देश दिया कि वे बागी कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे के खिलाफ दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता की याचिका पर दो महीने के भीतर फैसला लें। यह याचिका दो साल से अधिक समय से लंबित है। कोर्ट ने कहा कि संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत दायर याचिकाओं पर जल्द से जल्द फैसला लिया जाना चाहिए।

मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जायमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने सप्रे के खिलाफ दायर याचिका पर जल्द फैसला लेने से इनकार करने के लिए हाई कोर्ट के रुख पर भी नाराजगी जताई।

मध्य प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता उमंग सिंघार द्वारा जुलाई 2024 में दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि सप्रे ने अपनी मर्जी से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की सदस्यता छोड़ दी, वह पार्टी जिसके टिकट पर वे 2023 के विधानसभा चुनाव में चुनी गई थीं, और भाजपा में शामिल हो गईं।

मंदिर की जमीन से पेरियार की प्रतिमा हटाकर उपयुक्त जगह ले जाएं : हाई कोर्ट

मद्रास हाई कोर्ट ने तंजावुर के जिला कलेक्टर को तर्कवादी नेता ईवी रामासामी पेरियार की प्रतिमा मंदिर की जमीन से हटाकर चार सप्ताह के भीतर किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर ले जाने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि प्रतिमा अधिकारियों से अनुमति लिए बिना वहां स्थापित की गई थी. जस्टिस पी. वेलमुरुगन और जस्टिस केके रामकृष्णन की खंडपीठ ने तंजावुर जिले के तिरुवैयारू तालुका के कंडियूर स्थित अरुल्मिगु ब्रह्मसिरकंडेश्वरर मंदिर की जमीन से प्रतिमा हटाने का आदेश दिया।

जस्टिस पी. वेलमुरुगन और जस्टिस केके रामकृष्णन की खंडपीठ ने तंजावुर जिले के तिरुवैयारू तालुका के कंडियूर स्थित अरुल्मिगु ब्रह्मसिरकंडेश्वरर मंदिर की जमीन से प्रतिमा हटाने का आदेश दिया।

मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै पीठ ने आदेश में कहा,”चूंकि प्रतिमा मंदिर प्राधिकरण, जिला कलेक्टर या किसी अन्य सक्षम प्राधिकरण से अनुमति लिए बिना मंदिर की जमीन पर स्थापित की गई है, इसलिए कलेक्टर को निर्देश दिया कि वह प्रतिमा को मंदिर की जमीन से सुरक्षित तरीके से हटाएं और आज से चार सप्ताह के भीतर उसे किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर रखें तथा रिपोर्ट दाखिल करें।”

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