कोलगा-बताती प्रस्तावित कोल ब्लॉक की नीलामी को लेकर विरोधः 13 गांव के सैकड़ों ग्रामीणों ने खोला मोर्चा, जल, जंगल, जमीन के अस्तित्व नष्ट होने का हवाला देकर सरकार से नीलामी रद्द करने की मांग

कोरबा, 29 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में कोलगा-बताती कोयला ब्लॉक की नीलामी को लेकर आदिवासी क्षेत्रों में विरोध तेज हो गया है। कलगामार में आयोजित ग्रामसभा में 13 गांवों के सैकड़ों ग्रामीण जुटे और प्रस्तावित कोयला ब्लॉक की नीलामी का विरोध किया। ग्रामीणों ने जल, जंगल और जमीन पर संभावित प्रभावों को लेकर चिंता जताते हुए सरकार से नीलामी प्रक्रिया रद्द करने की मांग की।

कलगामार में हुई ग्रामसभा में कलगामार, तौलीपाली, मदवानी, कोलगा, बताती, चांपा, चोरभट्ठी, ताराईमार और भौभनीमार समेत 13 गांवों के ग्रामीण शामिल हुए। सभा में महिलाओं की भी बड़ी भागीदारी रही। ग्रामीणों का कहना है कि कोयला खनन शुरू होने से जंगल, जलस्रोत, खेती और उनकी आजीविका पर असर पड़ सकता है।

ग्रामीणों ने केंद्र और राज्य सरकार से प्रस्तावित 4 कोयला ब्लॉकों की नीलामी प्रक्रिया रद्द करने की मांग की है। उनका कहना है कि प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर ग्रामीण परिवारों के जीवन और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य पर खनन का असर पड़ सकता है।
ग्रामसभा में ग्रामीणों ने पांचवीं अनुसूची और पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम यानी पेसा कानून का हवाला देते हुए ग्रामसभा की भूमिका और सहमति का मुद्दा उठाया। ग्रामीणों ने अपनी मांगों को प्रशासन और सरकार तक पहुंचाने के लिए संगठनात्मक स्तर पर भी तैयारी की है।

कोयला खनन को लेकर राजगामार क्षेत्र में भी चिंता सामने आई है। ग्रामीणों के अनुसार, केरवा, कोरकोमा और केराबहार पंचायतों को संभावित खनन गतिविधियों से प्रभावित होने का डर है। बताया गया है कि संबंधित ब्लॉक के संबंध में ग्रामसभा आयोजित करने के लिए पत्र जारी होने के बाद सरपंच और ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचे और ग्रामसभा रद्द करने की मांग की। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे चरणबद्ध आंदोलन करेंगे।

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