पसान में हाथियों के दल का आतंकः धान की फसल व कच्चे मकानों को किया नुकसान, सांसद महंत ने दिए सुरक्षा के निर्देश

कोरबा, 24 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के पसान क्षेत्र में जंगली हाथियों की लगातार आवाजाही से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। पिछले एक सप्ताह से करीब 40 हाथियों का दल पसान, कोरबी, मोरगा और आसपास के जंगलों में विचरण कर रहा है। हाथियों के गांवों में घुसने से किसानों की धान की खड़ी फसल को नुकसान पहुंच रहा है, वहीं कई कच्चे मकानों को भी क्षति पहुंचने की जानकारी सामने आई है। मामले को गंभीरता से लेते हुए कोरबा सांसद ज्योत्सना चरणदास महंत ने वन विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों से चर्चा कर प्रभावित गांवों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और नुकसान का आकलन कर प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने के निर्देश दिए हैं।

जानकारी के अनुसार, पसान, कोरबी, मोरगा और आसपास के वन क्षेत्रों में हाथियों का झुंड लगातार विचरण कर रहा है। शाम होते ही हाथियों के गांवों की ओर आने से ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गई है। अपनी फसलों और घरों की सुरक्षा के लिए ग्रामीणों को रातभर जागकर पहरा देना पड़ रहा है।

हाथियों को आबादी वाले क्षेत्रों से दूर रखने के लिए ग्रामीण टॉर्च और ढोल-नगाड़ों का सहारा ले रहे हैं। इसके बावजूद हाथियों की आवाजाही से खतरा बना हुआ है। हाथियों के उत्पात से कई किसानों की धान की फसल को नुकसान पहुंचा है। वहीं, कुछ कच्चे मकानों को क्षति पहुंचने से प्रभावित परिवारों के सामने आर्थिक संकट की स्थिति भी बन रही है।

हाथियों की लगातार आवाजाही और ग्रामीणों की परेशानियों को देखते हुए सांसद ज्योत्सना चरणदास महंत ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सरपंचों और वनमंडल के अधिकारियों से चर्चा कर स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने ग्रामीणों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए प्रभावित गांवों में सतर्कता बढ़ाने पर जोर दिया।

सांसद ने वन विभाग को हाथी प्रभावित क्षेत्रों में गश्त बढ़ाने, हाथी मित्र दलों को सक्रिय रखने और मुनादी के माध्यम से ग्रामीणों को समय रहते सतर्क करने के निर्देश दिए। उन्होंने हाथियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखने तथा आवश्यक कर्मचारियों और संसाधनों की व्यवस्था करने की बात भी कही।

सांसद ने अधिकारियों से हाथियों के कारण हुए फसल नुकसान, मकानों की क्षति और अन्य जन-धन हानि का जल्द आकलन करने को कहा है। उन्होंने शासन के प्रावधानों के अनुसार पात्र प्रभावित परिवारों को मुआवजा उपलब्ध कराने और प्रक्रिया में लापरवाही नहीं बरतने पर जोर दिया।

उन्होंने ग्रामीणों से भी अपील की कि हाथियों के दिखाई देने पर उनसे सुरक्षित दूरी बनाए रखें। हाथियों को परेशान करने या उनके पास जाने से बचें और उनकी मौजूदगी की सूचना तत्काल वन विभाग को दें। रात के समय अकेले जंगल की ओर जाने से भी बचने की सलाह दी गई है।

कोरबा जिले के पसान, पोड़ी-उपरोड़ा, कटघोरा और केंदई वन क्षेत्रों में हाथियों की आवाजाही की समस्या सामने आती रही है। धान की फसल पकने के दौरान हाथियों के गांवों और खेतों की ओर आने से फसलों को नुकसान पहुंचने तथा मानव-हाथी संघर्ष का खतरा बढ़ सकता है।

ऐसे में प्रभावित गांवों में निगरानी, समय पर सूचना और ग्रामीणों को जागरूक करना जरूरी है। सांसद ज्योत्सना महंत ने प्रशासन से सुरक्षा के लिए टॉर्च, मशाल और अन्य आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने तथा जागरूकता अभियान चलाने पर जोर दिया है, ताकि ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और नुकसान को कम किया जा सके।

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