जिले में सिकल सेल की बीमारी से जूझ रहे 550 से अधिक मरीज चिह्नितः पेंशन और शिक्षा सहायता का लाभ किसी को नहीं मिल रहा, जानकारी का अभाव

कोरबा, 20 अक्टूबर। जिले में सिकल सेल की बीमारी से जूझ रहे 550 से अधिक मरीज चिह्नित हैं, लेकिन इनके लिए उपलब्ध सरकारी सहायता का लाभ जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पा रहा है। बीमारी के साथ आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहे मरीजों के लिए पेंशन और शिक्षा सहायता जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं, इसके बावजूद जानकारी के अभाव में बड़ी संख्या में मरीज और उनके परिवार इन योजनाओं से वंचित हैं।

स्थिति यह है कि दिव्यांगता के आधार पर पेंशन दिलाने के लिए आवेदन की प्रक्रिया तो जारी है, लेकिन अब तक किसी मरीज को इसका लाभ नहीं मिल पाने की जानकारी सामने आई है। इससे योजनाओं के क्रियान्वयन और पात्र हितग्राहियों तक सहायता पहुंचाने के प्रयासों पर सवाल उठ रहे हैं।

सिकल सेल एक आनुवंशिक रक्त संबंधी बीमारी है। इसमें लाल रक्त कोशिकाओं का आकार असामान्य हो जाता है, जिससे शरीर के विभिन्न अंगों तक आक्सीजन पहुंचने में परेशानी हो सकती है। मरीजों को समय-समय पर तेज दर्द, कमजोरी और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है। बीमारी की गंभीरता के अनुसार नियमित चिकित्सकीय देखभाल की आवश्यकता होती है। कई बार उपचार के लिए बार-बार अस्पताल जाना पड़ता है, जिससे मरीजों के साथ उनके परिवारों पर भी आर्थिक दबाव बढ़ता है। ऐसी स्थिति में सरकारी योजनाओं के माध्यम से मिलने वाली आर्थिक सहायता उनके लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

जिले में सिकल सेल मरीजों की पहचान और उपचार के लिए प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन केवल मरीजों को चिह्नित कर लेना पर्याप्त नहीं है। जरूरत इस बात की है कि मरीजों और उनके परिजनों को बीमारी से संबंधित चिकित्सा सुविधाओं के साथ सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की जानकारी भी दी जाए। उन्हें पात्रता की शर्तों, आवश्यक दस्तावेजों और आवेदन की प्रक्रिया समझाकर लाभ दिलाने तक सहयोग किया जाना चाहिए।

पेंशन के लिए दिव्यांगता प्रमाणपत्र बनवाने की प्रक्रिया और अन्य पात्रता शर्तों की जानकारी के अभाव में कई मरीज आवेदन नहीं कर पाते। वहीं, कुछ परिवारों को यह भी पता नहीं है कि बीमारी से प्रभावित व्यक्ति निर्धारित शर्तें पूरी करने पर सरकारी सहायता के लिए आवेदन कर सकते हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग, सामाजिक कल्याण विभाग और स्थानीय निकायों के बीच समन्वय बनाकर मरीजों तक योजनाओं की जानकारी पहुंचाना जरूरी है।

सिकल सेल से प्रभावित बच्चों और युवाओं की शिक्षा पर भी बीमारी का असर पड़ सकता है। बार-बार स्वास्थ्य संबंधी परेशानी, उपचार के लिए अस्पताल जाना और परिवार की सीमित आय के कारण पढ़ाई जारी रखना चुनौती बन जाता है। ऐसे विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति और शिक्षा सहायता की व्यवस्था महत्वपूर्ण हो सकती है। इसके बावजूद जानकारी के अभाव में पात्र विद्यार्थी इन सुविधाओं का लाभ लेने से चूक रहे हैं।

सिकल सेल से प्रभावित मरीजों को पेंशन का लाभ लेने के लिए सबसे पहले निर्धारित प्रक्रिया के तहत दिव्यांगता प्रमाणपत्र बनवाना होगा। इसके बाद आधार कार्ड, छत्तीसगढ़ निवास प्रमाणपत्र, आयु का प्रमाण, गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) होने का दस्तावेज और बैंक या डाकघर की पासबुक सहित आवश्यक कागजात तैयार रखने होंगे। पात्रता के अनुसार ग्रामीण क्षेत्र के हितग्राही ग्राम पंचायत और शहरी क्षेत्र के हितग्राही नगर निगम कार्यालय के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।

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