कही-सुनी @ रवि भोई

कही-सुनी (18 OCT-26) : रवि भोई
कांग्रेस के बड़े नेताओं को एकजुट कर पाएंगे सुखदेव भगत
कहा जा रहा है कि छत्तीसगढ़ कांग्रेस में अभी सबसे बड़ी समस्या नेताओं में एकजुटता की कमी है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज, नेता प्रतिपक्ष डॉ चरणदास महंत, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की धारा अलग-अलग है। माना जा रहा है कि 2018 के पहले कांग्रेस के बड़े नेता एकजुट हो गए थे। इस कारण 2018 में भारी बहुमत के साथ कांग्रेस की सरकार आई। कहते हैं 2018 के पहले भूपेश बघेल, चरणदास महंत और टी एस सिंहदेव जैसे नेताओं को एक मंच पर लाने का काम तत्कालीन प्रभारी महासचिव पी एल पुनिया ने किया। भले बाद में पुनिया ही निशाने पर आ गए। पुनिया के जाने के बाद शैलजा और फिर सचिन पायलट नेताओं को एक सूत्र में पिरो नहीं सके। शैलजा के कार्यकाल में तो तब के प्रदेश अध्यक्ष मोहन मरकाम के कुछ निर्णय चर्चा में रहे। अब प्रभारी बनकर सुखदेव भगत आए हैं। झारखंड के लोहरदगा के सांसद सुखदेव भगत छत्तीसगढ़ के प्रभारी बनने के बाद दो बार छत्तीसगढ़ का दौरा कर चुके हैं। सुखदेव भगत के स्वागत के लिए रायपुर विमानतल पर प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज के साथ नेता प्रतिपक्ष डॉ चरणदास महंत और उनकी सांसद पत्नी ज्योत्सना महंत दिखीं। भूपेश बघेल एआईसीसी के महासचिव और असम के प्रभारी हैं। वे पांच साल छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रहे। उसके पहले करीब छह साल प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर कांग्रेस संगठन का नेतृत्व किया। संगठन और सत्ता के मुखिया रहने के कारण छत्तीसगढ़ में उनका अपना आधार है। यह अलग बात है कि सत्ता में रहने के कारण उनसे नाखुश लोगों का भी एक वर्ग है। अभी वे राज्य की भाजपा सरकार के खिलाफ भी मुखर हैं। छत्तीसगढ़ में 2028 में विधानसभा चुनाव होना है। याने विधानसभा चुनाव को दो साल बचे हैं। अब सुखदेव भगत के सामने नेताओं को एकजुट कर भाजपा सरकार के खिलाफ चल रहे लहर को भुनाना बड़ी चुनौती है?
स्मृति ईरानी पूर्व विधायकों की सुध लेंगी
कहा जा रहा है कि बीजेपी की राष्ट्रीय महासचिव और छत्तीसगढ़ की प्रभारी स्मृति ईरानी 25 और 26 अक्टूबर को अपनी प्रस्तावित छत्तीसगढ़ यात्रा के दौरान बैठक में पूर्व विधायकों की भी बैठक लेंगी। इसके लिए पूर्व विधायकों को बुलावा भेजा जा रहा है। हल्ला है कि स्मृति ईरानी के साथ बैठक करने से पहले पूर्व विधायक बैठक कर रणनीति बनाने की तैयारी में हैं। इसके लिए वे 23 या 24 अक्टूबर को बैठक करने वाले हैं। पूर्व बीजेपी विधायकों का मानना है कि विधानसभा चुनाव में अब दो साल बचा है तो उन्हें याद किया जा रहा है। तीन साल तक न तो सत्ता में बैठे लोगों ने उन्हें याद किया और न ही संगठन के पदाधिकारियों ने। पूर्व विधायक सत्ता और संगठन की उपेक्षा से दुखी बताए जाते हैं। किन पूर्व विधायकों को बुलाया जाएगा, इसका फार्मूला तय किया जा रहा है। राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी छत्तीसगढ़ की प्रभारी बनने के बाद 25 और 26 अक्टूबर को पहली बार रायपुर आने वालीं हैं। उनके साथ सह-प्रभारी सिद्धार्थ शंभू भी आएंगे। माना जा रहा है कि स्मृति ईरानी मंत्रियों और भाजपा पदाधिकारियों की अलग-अलग बैठक लेंगी।
प्रदेश अध्यक्ष के लिए चर्चा में ओपी का नाम
हल्ला है कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव को मंत्री बनाया जा सकता है। वैसे किरण देव का दायित्व बदलने की सुगबुगाहट काफी दिनों से चल रही है। दुर्घटना में घायल होने के बाद उनकी जिम्मेदारी बदलने की चर्चा कुछ ज्यादा तेज हो गई है। पहले किरण देव की जगह केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू का नाम चला। अब प्रदेश अध्यक्ष के लिए मंत्री ओपी चौधरी का नाम भी सुर्ख़ियों में बताया जा रहा है। ओपी चौधरी आईएएस की नौकरी छोड़कर 2018 के विधानसभा चुनाव के पहले बीजेपी में प्रवेश किया था। वे 2018 में खरसिया विधानसभा से चुनाव लड़े, पर विधानसभा नहीं पहुँच सके। अरुण साव प्रदेश अध्यक्ष बने तो ओपी चौधरी को प्रदेश महामंत्री बनाया गया। फिर 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्हें रायगढ़ विधानसभा से उम्मीदवार बनाया गया। वे चुनाव जीते। विष्णुदेव साय कैबिनेट में अभी वित्त,जीएसटी और आवास-पर्यावरण मंत्री हैं। ओपी चौधरी को बीजेपी में लाने वाले डॉ रमन सिंह हैं। ओपी चौधरी को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का करीबी कहा जाता है। ओपी चौधरी को भाजपा हाईकमान ने जेन जी को साधने के लिए बनी टीम में रखा है। ओपी चौधरी की पहचान युवाओं को मोटिवेट करने वाले के तौर पर भी है।
बिजली सप्लाई बेपटरी
छत्तीसगढ़ को सरप्लस बिजली वाला राज्य कहा जाता रहा है। पर इन दिनों छत्तीसगढ़ से सरप्लस बिजली वाला तमग़ा छिन गया है। उद्योगों को पर्याप्त बिजली नहीं मिल पा रही है। कहीं उद्योगों की छह घंटे बिजली काटी जा रही है, तो कहीं 12 घंटे उद्योग शांत पड़े हैं। मौसम में उतार-चढ़ाव के साथ कृषि क्षेत्र में मांग बढ़ी है। साथ में बिजली का प्रोडक्शन भी गड़बड़ाया है। कोयला के गीले रहने से बिजली घरों की उत्पादकता घटी है। कहते हैं बिजली बोर्ड की अदूरदर्शी नीति भी बिजली सॉर्टेज के लिए जिम्मेदार है। बिजली की कमी की भरपाई के लिए कभी उत्तरप्रदेश से तो कभी हरियाणा से बिजली खरीदनी पड़ रही है। बताते है समझौते के तहत पहले उत्तरप्रदेश को सस्ते में छत्तीसगढ़ ने बिजली बेची। अब महंगे में खरीदनी पड़ रही है। भरपूर कोयला और पानी छत्तीसगढ़ में होने के बाद बिजली संकट से लोगों का सिर चकरा रहा है। माना जाता है सस्ती बिजली के कारण स्टील से लेकर कई तरह के उद्योग छत्तीसगढ़ में स्थापित हुए। अब छत्तीसगढ़ में बिजली ओडिशा और झारखंड से महंगी हो गई है। उद्योगपतियों को छत्तीसगढ़ के रेट पर महाराष्ट्र में भी बिजली मिल जा रही है। छत्तीसगढ़ में महंगी और अपर्याप्त बिजली के कारण यहां के उद्योगपति ओडिशा की तरफ रुख करने की सोचने लगे हैं। कोयले के सूखने और ठंड बढ़ने से ही उद्योगों को लग रहा बिजली का झटका थमने के आसार हैं।
विधायक जी की चहुंमुखी प्रगति
कहते हैं दुर्ग संभाग के एक विधायक की पांचों उँगलियाँ घी में हैं। नेता जी जब से विधायक बने हैं, तब से उनकी चहुंमुखी प्रगति हो रही है। पहले उनके पास पुश्तैनी धंधे वाली एक दुकान थी, पर विधायक बनने के बाद वे पीले धातु के कारोबार में उतर गए और दुकानों की संख्या बढ़ाते जा रहे हैं। हल्ला है कि विधायक जी किसी के साथ मिलकर मीडिया में भाग्य आजमाने लगे हैं। अब मीडिया विधायक जी को कितना फलता है, यह तो समय ही बताएगा। पर सेवा देने वाले घूम-घूमकर उनके कपड़े उतारने में लग गए हैं।
(लेखक पत्रिका समवेत सृजन के प्रबंध संपादक और स्वतंत्र पत्रकार हैं।)
