मरीज को मिला था तत्काल वेंटिलेटर सपोर्ट, परिजन खुद ले गए थे निजी अस्पताल -मेडिकल कॉलेज प्रबंधन

इलाज में नहीं बरती गई कोई लापरवाही, : अस्पताल अधीक्षक
वेंटिलेटर के अभाव में मरीज की मौत का दावा तथ्यहीन, अस्पताल प्रबंधन ने जारी किया खंडन
कोरबा 22 सितम्बर 2026/ स्व. बिसाहू दास महंत स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय कोरबा प्रबंधन ने समाचार पत्र में प्रकाशित खबर ‘‘वेंटिलेटर के लिए मरीज को लेकर भटकते रहे परिजन, नहीं मिला ईलाज, हो गई मौत‘‘ का खंडन करते हुए इसे पूरी तरह निराधार बताया है।
अस्पताल प्रबंधन ने वस्तुस्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि कचंदा निवासी अरुण दास (उम्र 29 वर्ष) को 14 सितंबर 2026 की सुबह 10.45 बजे बुखार के कारण आपातकालीन विभाग में भर्ती कराया गया था। मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए कुछ ही देर बाद, सुबह 11.39 बजे उसे आईसीयू वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया था, जहां उसे इन्टीब्यूट कर वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखकर सतत निगरानी में उपचार दिया जा रहा था। इस संबंध में मरीज के परिजनों को भी पूरी जानकारी दी जा चुकी थी। इसके बावजूद 16 सितंबर 2026 की दोपहर 1.45 बजे परिजन मरीज को लामा (स्।ड।-लीव अगेंस्ट मेडिकल एडवाइस) कराकर अपनी मर्जी से कोरबा के एक निजी चिकित्सालय ले गए थे।
प्रबंधन के अनुसार, चिकित्सालय के कैजुअल्टी विभाग में पदस्थ डॉ. रविकांत राठौर और बजरंग दल के जिला अध्यक्ष राणा मुखर्जी से बातचीत में यह तथ्य सामने आया है कि 17-18 सितंबर की रात को चिकित्सक और उनके बीच किसी भी प्रकार की कोई बहस नहीं हुई थी। मरीज के इलाज में किसी भी तरह की कोई देरी अथवा लापरवाही नहीं बरती गई थी, जिसके संबंध में डॉ. रविकांत राठौर ने स्पष्ट जानकारी दी गई है।
संयुक्त संचालक सह अस्पताल अधीक्षक ने कहा कि प्रकाशित खबर पूरी तरह असत्य है, जिसका उद्देश्य केवल चिकित्सकों एवं अस्पताल प्रबंधन की छवि को धूमिल करना है। प्रबंधन इस भ्रामक खबर का स्पष्ट खंडन करता है और यह दोहराता है कि अस्पताल प्रबंधन मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सदैव प्रतिबद्ध है।
