श्रद्धा और उत्साह से मनाया गया हलषष्ठी पर्व

कोरबा 03 सितम्बर। कटघोरा एवं आसपास क्षेत्र में भी छत्तीसगढ़ी संस्कृति एवं परंपरा के अनुरूप हुआ आयोजन,खराब मौसम भी नहीं डिगा माताओं का उत्साह के में माताओं द्वारा संतान की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य एवं दीर्घायु की मंगलकामना के साथ कमरछठ पर्व श्रद्धा,आस्था एवं पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुरूप मनाया गया। वर्षा एवं खराब मौसम के बावजूद पर्व को लेकर माताओं एवं श्रद्धालुओं में उत्साह बना रहा और बड़ी संख्या में महिलाओं ने अपनी सहभागिता निभाई। पर्व के अवसर पर प्रातः10 बजे के बाद से समूहवार पूजा-अर्चना का शुभारंभ किया गया।
महिलाओं ने पारंपरिक विधि-विधान के साथ पूजा संपन्न की जिसमें सुबह से भैंस की दूध की व्यवस्था बिना हल चले हुए खेतों में छह प्रकार भाजी की व्यवस्था प्रसाद में महुआ लाई राहर दाना भैंस के दूध में पसहर के चावल से खीर बनाना भाजी सेंधा नमक से बना हुआ प्रसाद में उपयोग किया जाता है परिवार एवं संतान की दीर्घायु सुख-शांति और मंगलमय जीवन की कामना करते हुए पीठ मे 7-7 बार ठप्पा लगाया जाता है इसी क्रम में गौतम गुड्डू रामसनेही महाराज के निवास पर उनकी माताजी के मार्गदर्शन में कमरछठ की कथा एवं सामूहिक आरती का आयोजन किया गया। माताओं एवं श्रद्धालुओं ने एकजुट होकर कथा का श्रवण किया और आरती में शामिल होकर पर्व की धार्मिक एवं सांस्कृतिक भावना को आत्मसात किया।
कमरछठ पर्व का आयोजन केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है,बल्कि यह छत्तीसगढ़ की लोकपरंपरा,संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों को जीवंत रखने वाला महत्वपूर्ण पर्व है। बदलते समय के बीच भी ग्रामीण अंचलों में इस प्रकार के पारंपरिक पर्वों का आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों एवं सांस्कृतिक विरासत से जोडने का माध्यम बन रहा है।बारिश और मौसम की प्रतिकूलता भी माताओं की श्रद्धा के सामने बाधा नहीं बन सकी।पूरे उत्साह एवंसामूहिक भावना के साथ पर्व मनाकर ग्रामवासियों ने ‘परंपरा कायम रहे और संस्कृति सिकन,दरहीन,आयो जन के दौरान आपसी सामाजिक एकता एवं श्रद्धा का सुंदर वातावरण देखने को मिला ।उक्तपर्व जवाली, चाकाबूढ़ा, रजकम्मा, छुरी , में भी पूरे श्रद्धा भाव से मनाया गया।
