पत्नि की हत्या मामले में आरोपी पति को हुई 10 साल सश्रम कारावास की सजा

कोरबा 02 सितंबर। शराब के नशे में पति ने पत्नी से विवाद करने के साथ न केवल मारपीट की बल्कि उसकी जिंदगी छीन ली। मार्च 2026 में हुई इस घटना की सुनवाई स्थानीय सत्र न्यायालय में रिकार्ड समय में पूरी हुई। द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश डॉ. ममता भोजवानी ने आरोपी पति को 10 साल के सश्रम कारावास की सजा से दंडित किया है।

कोरबा जिले के करतला पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत चौराभाठा डोंगाआमा में यह घटना 5 मार्च 2026 की मध्य रात्रि हुई थी। यहां रहने वाले ठाकुर राम राठिया 52 वर्ष के द्वारा अपनी पत्नी कुंतीबाई राठिया के साथ घटना दिवस को भोजन को लेकर विवाद किया गया। पति शराब के नशे में था। इसी बात को लेकर दंपत्ति में जमकर फसाद हुआ। इससे चिढकर आरोपी ने पत्नी के सिर पर डंडे से जानलेवा हमला किया। कुंती को गंभीर चोट आने की जानकारी होने के बावजूद उसका उपचार कराने में रूचि नहीं ली गई। अगली सुबह कुंतीबाई ने दम तोड़ दिया। मृतक के परिजन तुलसीराम राठिया ने इसे मृत देखा। वह खून से लथपथ पड़ थी। इस मामले में करतला पुलिस ने धारा 103ए का प्रकरण अपराध क्रमांक 37/2026 कायम किया। शव परीक्षण का पंचनामा के साथ मौके से साक्ष्य बरामद किए गए और आरोपी ठाकुर राम का बयान दर्ज किया गया।

विशेष लोक अभियोजक सुनील मिश्रा ने बताया कि अभियोग पत्र को 15 मई 2026 को प्रस्तुत किया गया और 25 जून को चार्जशीट पेश की गई। इस पर गवाही की प्रक्रिया 9 जुलाई से शुरू हुई। इस प्रकरण में मौके से जब्त सामाग्री को फोरेंसिक लाइबोरेट्री भेजा गया और उसकी रिपोर्ट पेश की गई। यह प्रकरण द्वितीय अपर सत्र न्यायालय डॉ. ममता भोजवानी की अदालत में चला। जिसमें दोषसिद्ध आरोपी के साथ उसके अधिवक्ता और विशेष लोक अभियोजक के पक्ष को सुना गया। आरोपी की ओर से ऐसा कहा गया कि उसका आशय पत्नी की हत्या करने का नहीं था। उसका आपराधिक रिकार्ड नहीं रहा है। इसलिए उसे न्यूनतम दंड दिया जाए।

कोर्ट ने तमाम दलीलों को सुनने के पश्चात् माना कि संपूर्ण परिस्थितियों में आरोपी का कृत्य गंभीर प्रकृति का होना पाया गया, इसलिए आरोपी को धारा 105-2बीएनएस के अपराध के लिए 10 वर्ष के सश्रम कारावास और 2000 के अर्थदंड से दंडित किया जाता है। इसकी अदायगी के अभाव में 6 महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। विशेष लोक अभियोजक ने बताया कि इस प्रकरण में विधिक सेवा प्राधिकरण कोरबा को अनुशंसा की गई कि मृतका के वारिशों को नियमानुसार उचित क्षतिपूर्ति दी जाने की व्यवस्था की जाए।

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