निर्माण कार्य पूरा होने से पहले ही नहर का हिस्सा धंसने लगा, मरम्मत की गुणवत्ता पर उठे सवाल

कोरबा 31 अगस्त। बरसात के बीच कोरबा शहर क्षेत्र में चल रहे नहर मरम्मत एवं निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। सिंचाई विभाग द्वारा करीब 7 करोड़ रुपये की लागत से मानसनगर नहर से सुनालिया पुल तक नहर के मरम्मत एवं निर्माण का कार्य कराया जा रहा है। बताया जा रहा है कि काम अभी पूरा भी नहीं हुआ है, लेकिन कई स्थानों पर नहर का हिस्सा क्षतिग्रस्त होकर धंसने लगा है।
मौके से सामने आई तस्वीरों में नहर की दीवारों में दरारें पडने, कंक्रीट की परत टूटने और कुछ हिस्सों के नीचे खिसकने की स्थिति दिखाई दे रही है। वहीं, दीवार के ऊपरी हिस्से में मिट्टी का कटाव भी नजर आ रहा है। निर्माणाधीन नहर की यह स्थिति कार्य की गुणवत्ता और निर्धारित तकनीकी मानकों के पालन को लेकर सवाल खड़े कर रही है।
बरसात के दौरान नहर में पानी का दबाव बढने पर कमजोर हिस्सों के और क्षतिग्रस्त होने की आशंका जताई जा रही है। सवाल उठ रहे हैं कि निर्माण के दौरान बेस तैयार करने, मिट्टी की मजबूती, जल निकासी और कंक्रीट कार्य में निर्धारित तकनीकी मापदंडों का कितना पालन किया गया। विभागीय जानकारी के अनुसार, उक्त कार्य का ठेका विष्णु अग्रवाल से संबंधित बताया जा रहा है। वहीं मौके पर काम पेटी ठेकेदार के माध्यम से कराए जाने की बात भी सामने आ रही है। हालांकि, पेटी ठेकेदार की भूमिका, निर्माण में इस्तेमाल सामग्री और कार्य की तकनीकी गुणवत्ता को लेकर विभाग की ओर से अभी स्थिति स्पष्ट किया जाना बाकी है।
स्थानीय स्तर पर मांग उठ रही है कि जल संसाधन विभाग के अधिकारी मौके का निरीक्षण कर नहर निर्माण की तकनीकी गुणवत्ता की जांच करें। साथ ही जिन स्थानों पर नहर क्षतिग्रस्त हुई है, वहां महज ऊपरी मरम्मत के बजाय तकनीकी मानकों के अनुरूप आवश्यक सुधार कर उसे मजबूत तरीके से तैयार कराया जाए।
करोड़ों रुपये की लागत से हो रहे इस महत्वपूर्ण कार्य में यदि निर्माण पूरा होने से पहले ही खामियां सामने आ रही हैं, तो इसकी निष्पक्ष तकनीकी जांच जरूरी मानी जा रही है। अब देखना होगा कि जल संसाधन विभाग इन शिकायतों को कितनी गंभीरता से लेता है और गुणवत्ता को लेकर उठ रहे सवालों पर क्या कार्रवाई करता है।
