बसाहट के बिना लोगों को उजाड़ रहा एसईसीएल, ग्रामीणों ने किया विरोध

कोरबा 12 अगस्त। हरदीबाजार में मकान तोड़े जाने को लेकर एक बार फिर पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामवासियों का आक्रोश सामने आया है। मंगलवार को शांतिनगर में एक मकान तोडने का काम शुरू होने की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में पंचायत प्रतिनिधि और ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और इसका कड़ा विरोध किया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि (एसईसीएल) दीपका प्रबंधन की नीतियों के कारण मकान मालिक अपने मकान तोडने के लिए मजबूर हो रहे हैं।
बताया गया कि शांतिनगर निवासी सेवानिवृत्त एसईसीएल कर्मचारी चित्रेश साहू का दो मंजिला मकान है। उन्होंने मकान तोडने का ठेका दिया है। कुछ दिन पूर्व सरपंच एवं मोहल्लेवासियों ने गांव के हित में उनसे कुछ माह तक मकान नहीं तोडने का आग्रह करते हुए सहयोग मांगा था। ग्रामीणों के मुताबिक, इसके बावजूद दो दिन बाद मकान तोडने का काम दोबारा शुरू कर दिया गया। इसकी जानकारी मिलते ही पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचकर विरोध दर्ज कराया।
हरदीबाजार सरपंच लोकेश्वर कंवर ने कहा कि एसईसीएल प्रबंधन को सबसे पहले ग्रामवासियों की मांगों और लंबित मुद्दों को स्पष्ट करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सर्वसुविधायुक्त पुनर्वास स्थल, रोजगार, मुआवजा कटौती तथा मकान तोड़े जाने से पहले 50 प्रतिशत मुआवजा राशि का भुगतान सुनिश्चित किया जाए। इसके साथ ही वर्ष 2004 में अधिग्रहण के समय लागू नीति तथा हाईकोर्ट के फैसले के अनुसार एक डिसमिल जमीन पर नौकरी देने के मुद्दे पर भी स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।
पूर्व जनपद सदस्य अनिल टंडन ने कहा कि पूर्व में हुई त्रिपक्षीय वार्ता में ग्रामवासियों के समक्ष स्पष्ट रूप से कहा गया था कि जब तक पुनर्वास स्थल को सर्वसुविधायुक्त नहीं बनाया जाता और मकान तोडने से पहले 50 प्रतिशत मुआवजा राशि नहीं दी जाती, तब तक किसी भी ग्रामीण के मकान की एक ईंट तक नहीं निकाली जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि जमीनी स्तर पर स्थिति इसके विपरीत दिखाई दे रही है। ग्रामीणों का कहना है कि पहले पुनर्वास और मुआवजे से जुड़े सभी मुद्दों का समाधान किया जाए, उसके बाद ही मकान तोडने की कार्रवाई आगे बढ़ाई जाए।
