एग्रीस्टेक पोर्टल में पंजीयन करवाने की बदली व्यवस्थाः ऋण पुस्तिका में दर्ज सभी लोगों का एग्रीस्टेक पंजीयन अनिवार्य, तभी बेच सकेंगे किसान धान

कोरबा 24 जुलाई। खरीफ सीजन में धान की खेती करने वाले किसानों के लिए इस वर्ष धान बेचने की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक जटिल होती जा रही है। शासन द्वारा एग्रीस्टैक पंजीयन को अनिवार्य किए जाने के बाद अब इसमें एक नई शर्त जोड़ दी गई है। इसके तहत केवल खातेदार किसान का पंजीयन पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि ऋण पुस्तिका (बी-1/खसरा) में जिन-जिन व्यक्तियों का नाम दर्ज है, उन सभी का भी पंजीयन और सत्यापन अनिवार्य किया गया है। इसके बाद ही किसान समर्थन मूल्य पर उपार्जन केंद्रों में अपनी धान बेच सकेंगे।

जानकारी के अनुसार कोरबा जिले में लगभग डेढ़ लाख से अधिक किसान हैं। इनमें से हर वर्ष हजारों किसान विभिन्न तकनीकी कारणों, दस्तावेजी त्रुटियों या पंजीयन संबंधी समस्याओं के कारण समर्थन मूल्य पर धान बेचने से वंचित रह जाते हैं। इस बार एग्रीस्टैक पंजीयन की नई व्यवस्था लागू होने से किसानों की चिंताएं और बढ़ गई हैं। नई व्यवस्था के अनुसार जिन किसानों की ऋण पुस्तिका में खातेदार के अलावा भाई, बहन, पत्नी, पुत्र, पिता या अन्य सह-खातेदारों के नाम दर्ज हैं, उन सभी को भी पंजीयन प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसके लिए संबंधित व्यक्ति को चॉइस सेंटर, सहकारी समिति या निर्धारित पंजीयन केंद्र पर उपस्थित होना होगा। यदि वह स्वयं उपस्थित नहीं हो सकता, तो ऑनलाइन माध्यम से ओटीपी आधारित सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ेगी। इस सत्यापन के बाद ही पंजीयन मान्य माना जाएगा।

सबसे अधिक परेशानी उन परिवारों को होने की आशंका है जिनके सदस्य रोजगार, शिक्षा या अन्य कारणों से दूसरे शहरों अथवा दूसरे राज्यों में रहते हैं। दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या भी बड़ी चुनौती बन सकती है। ऐसे में सभी सह-खातेदारों की समय पर उपस्थिति और सत्यापन कराना किसानों के लिए कठिन साबित हो सकता है। किसानों का कहना है कि धान बेचने की प्रक्रिया पहले से ही कई औपचारिकताओं से जुड़ी हुई है। अब नई शर्तों के कारण उन्हें अतिरिक्त भागदौड़ और आर्थिक खर्च उठाना पड़ेगा। उनका मानना है कि यदि समय रहते सभी औपचारिकताएं पूरी नहीं हो पाईं तो बड़ी संख्या में किसान समर्थन मूल्य पर धान बेचने से वंचित रह सकते हैं।

हालांकि शासन का तर्क है कि एग्रीस्टैक पंजीयन और सह-खातेदारों के सत्यापन से फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी तथा वास्तविक किसानों को ही सरकारी योजनाओं और धान खरीदी का लाभ मिलेगा। लेकिन किसानों और कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि व्यवस्था को सरल बनाने के बजाय यदि इसे अत्यधिक जटिल बनाया गया, तो इसका सबसे अधिक नुकसान छोटे और सीमांत किसानों को उठाना पड़ेगा। पिछले वर्ष भी पंजीयन और दस्तावेजी विसंगतियों के कारण जिले के हजारों किसान समर्थन मूल्य पर अपनी उपज नहीं बेच पाए थे। ऐसे में इस बार लागू नई व्यवस्था को लेकर किसानों में असमंजस और चिंता का माहौल बना हुआ है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शासन किसानों की समस्याओं को देखते हुए प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए कोई राहत देता है या नहीं।

Spread the word