अमहवा गांव में खुली विकास की पोलः नदी पर पुल की मांग लंबे समय से, अब तक न तो किसी सांसद ने सुना न विधायक ने, बारिश में होती है लोगों को भारी समस्याएं

कोरबा 22 जुलाई। कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी और जिला खनिज न्यास मद के हजारों करोड़ ऑन की व्यवस्था पूरे के साथ शहर से लेकर से गांव-गांव तक सडक, पुल, भवन और अन्य बुनियादी सुविधाएं पहुंचाई जा रही है। इसके ठीक दूसरी और जिला मुख्यालय से करीब 80 किलोमीटर दूर पोंडी उपरोड़ा विकासखंड के ग्राम पंचायत पचरा के आश्रित गांव अमहवा की स्थिति विकास की पोल खोलती है। बारिश के दौर में यहां कुल मिलाकर लोगों के सामने समस्याएं हैं।

लगातार हो रही बारिश ने इस गांव की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं। अमहवा गांव कटोरी नदी और तान नदी के बीच बसा हुआ है। बारिश शुरू होते ही दोनों नदियां उफान पर आ जाती हैं और गांव का संपर्क पूरी तरह बाहरी दुनिया से कट जाता है। पिछले लगभग एक सप्ताह से गांव के लोग अपने घरों में कैद होकर रह गए हैं। गांव से बाहर निकलने का कोई वैकल्पिक रास्ता नहीं है। ऐसे में रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना ग्रामीणों के लिए टास्क बन गई है। सबसे विकट स्थिति तब बनती है जब किसी को राशन, दवाइ यां किसी जरूरी काम के लिए बाहर जाना हो, ग्रामीणों को उफनती नदी पार करनी पड़ता है । कई बार लोग बाढ़ का पानी उतरने की प्रतीक्षा करते हैं और फिर देर होने पर जोखिम लेने से पीछे नहीं रहते। सरकारी योजनाओं का लाभ भी ग्रामीणों तक पूरी तरह नहीं पहुंच पा रहा है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत मिलने वाला राशन भी ग्रामीणों को नदी पार कर लाना पड़ता है। बारिश के दिनों में यह काम बेहद जोखिम भरा हो जाता है। महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे भी इस परेशानी से अछूते नहीं हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों से वे पुल और सडक निर्माण की मांग करते आ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वर्तमान सांसद ज्योसना महंत, तत्कालीन विधायक मोहितराम केरकेट्टा और वर्तमान विधायक तुलेश्वर मरकाम सभी गांव का दौरा कर चुके हैं। हर बार ग्रामीणों को जल्द समस्या के समाधान का आश्वासन दिया गया, लेकिन आज तक कोई ठोस पहल नहीं हुई। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि कलेक्टर को कई बार आवेदन सौंपे गए, लेकिन प्रशासन की ओर से भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। ग्रामीणों का कहना है कि यदि आने वाले चुनाव से पहले गांव में पुल और सडक का निर्माण नहीं कराया गया, तो पूरा गांव चुनाव का बहिष्कार करेगा। उनका साफ कहना है कि जब तक बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलतीं, तब तक सिर्फ वोट मांगने आने वाले नेताओं का गांव में स्वागत नहीं किया जाएगा।

स्कूल जाना है तो देनी पड़ेगी अग्नि परीक्षा
बारिश के मौसम में विद्यार्थियों को भी नुकसान झेलना पड़ रहा है। अमहवा के स्कूली बच्चों को पढ़ाई के लिए करीब 8 किलोमीटर दूर जटगा जाना पड़ता है। लेकिन नदी में तेज बहाव होने के कारण बच्चे कई-कई दिनों तक स्कूल नहीं पहुंच पाते। जो बच्चे पढ़ाई के प्रति गंभीर हैं, वे अपनी जान जोखिम में डालकर नदी पार करते हैं। कह सकते हैं कि स्थानीय विद्यार्थियों को अग्नि परीक्षा के दौर से गुजरना पड़ता है। ऐसे में विद्यार्थियों के घर आने तक परिजनों की चिंता इस बात की रहती है कि वह ठीक है या नहीं।स्वास्थ्य सुविधाओं का हाल भी ऐसा ही है । गांव में यदि कोई बीमार पड़ जाए या किसी गर्भवती महिला को तत्काल अस्पताल ले जाने की जरूरत हो, तो ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ी समस्या मरीज को गांव से बाहर निकालने की होती है। सडक और पुल के अभाव में एम्बुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकती। ऐसे में मरीज को चारपाई या अन्य साधनों के सहारे नदी तक लाना और फिर किसी तरह नदी पार कर अस्पताल पहुंचाना पड़ता है। कई बार इलाज में देरी मरीज की जान पर भारी पड़ सकती है।

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